अयोध्या से सपा प्रमुख ने दूसरी राजनीतिक चाल चल दी
पिछले चुनाव में भाजपा हार गयी थी
भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी हार रही
कई कल्याणकारी योजनाएं भी बता दी
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने हालिया अयोध्या दौरे के दौरान राज्य की राजनीति में एक नया राजनीतिक भूचाल ला दिया है। गुरुवार को पवित्र नगरी अयोध्या पहुंचे अखिलेश यादव ने मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सीधे तौर पर अयोध्या सीट से लड़ने की खुली चुनौती दी है।
उनकी इस दो टूक चुनौती ने राजनीतिक गलियारों और आम जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसकी मुख्य वजह यह है कि जिस अयोध्या को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राजनीतिक हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन का मुख्य केंद्र माना जाता है, उसी निर्वाचन क्षेत्र में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी उम्मीदवार को समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
वर्ष 2024 में भव्य राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से यह अयोध्या की उनकी तीसरी यात्रा थी, लेकिन इस दौरान एक बार फिर वे राम मंदिर जाने से बचते नजर आए, जिस पर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जनसभा को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि भगवा पार्टी को इस बार अयोध्या में एक मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार ढूंढने में भारी संघर्ष करना पड़ रहा है, और उनके आंतरिक सर्वे भी पार्टी को एक और शर्मनाक हार की ओर इशारा कर रहे हैं।
अपने समर्थकों की गड़गड़ाती तालियों के बीच अखिलेश यादव ने चुनौती देते हुए कहा कि जो मुख्यमंत्री बड़े-बड़े दावे करते हैं और अपनी जीत को लेकर अत्यधिक आश्वस्त नजर आते हैं, उन्हें अपनी ताकत दिखाने के लिए इस बार सीधे अयोध्या से चुनाव मैदान में उतरना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जब से उनकी पार्टी ने अयोध्या सीट के लिए अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया है, तब से बीजेपी खेमे में खलबली मची हुई है और वे लगातार सर्वे करा रहे हैं, लेकिन हर रिपोर्ट में पार्टी पिछड़ती नजर आ रही है।
चुनावी रणनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के जन-कल्याणकारी वादों को भी दोहराया। उन्होंने घोषणा की कि यदि राज्य में उनकी पार्टी की सरकार बनती है, तो प्रदेश की महिलाओं, माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हर साल 40,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उनके जीवन स्तर में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव आएगा।
इसके साथ ही, अयोध्या की ऐतिहासिक महिमा, सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक गौरव को पुनर्जीवित करने का खाका खींचते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार बनने पर भगवान राम की पावन जन्मस्थली इस शहर को वैश्विक पटल पर एक नई अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाएगी और इसके समग्र विकास को अभूतपूर्व गति दी जाएगी।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए बुलडोजर कार्रवाई और प्रशासनिक भेदभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और निवासियों को आश्वस्त किया कि भविष्य में जब समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में आएगी, तो जनता के साथ किसी भी प्रकार का पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाएगा और न ही किसी गरीब की दुकान या मकान पर बुलडोजर चलाया जाएगा।
गौरतलब है कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में ही अत्यंत महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने हैं, और सत्ताधारी दल तथा मुख्य विपक्षी गठबंधन दोनों ने ही अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अभी से युद्धस्तर पर जनसंपर्क अभियान और रैलियां शुरू कर दी हैं।