इंडिया गठबंधन की बैठक में अनुपस्थित रहने के बाद बयान
नहीं आने पर कई चर्चाएं फैली थी
भाजपा के दावों पर किया पलटवार
भाजपा का काम सिर्फ भ्रम फैलाना है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की हालिया महत्वपूर्ण बैठक में शामिल न होने को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमाम अटकलों के विपरीत विपक्षी गठबंधन पूरी तरह से एकजुट है और मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी दलों की यह एकजुटता और आपसी तालमेल ही आज भारतीय जनता पार्टी का सबसे बड़ा दुख और उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक चिंता बन गया है। अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में दिल्ली में बुलाई गई इंडिया गठबंधन की एक अहम बैठक से उनके और कुछ अन्य प्रमुख नेताओं के अनुपस्थित रहने पर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
विपक्षी गठबंधन की इस बैठक में जहां एक तरफ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और कथित चुनावी अनियमितताओं जैसे गंभीर मुद्दों पर रणनीति बनाई जानी थी, वहीं अखिलेश यादव की गैर-मौजूदगी को लेकर सत्ताधारी पार्टी ने गठबंधन के भीतर आंतरिक कलह और बिखराव के दावे करने शुरू कर दिए थे।
भारतीय जनता पार्टी के इन तमाम दावों और बयानों को सिरे से खारिज करते हुए सपा प्रमुख ने दो टूक शब्दों में कहा कि विरोधी दल जानबूझकर गठबंधन को कमजोर दिखाने के लिए भ्रामक और मनगढ़ंत खबरें फैला रहे हैं, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के मौजूदा राजनीतिक हालात में तानाशाही प्रवृत्तियों और संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट होकर एक मंच पर खड़ा है। उनके अनुसार, बीजेपी इस बात से सबसे ज्यादा परेशान है कि तमाम राजनीतिक विविधताओं के बावजूद तमाम विपक्षी दल एक साझा वैचारिक मंच पर लगातार संवाद बनाए हुए हैं और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त रूप से आवाज बुलंद कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े सूबे में समाजवादी पार्टी की राजनीतिक जमीन और उसकी क्षेत्रीय ताकत को देखते हुए इंडिया गठबंधन में अखिलेश यादव की भूमिका बेहद अहम है। हालांकि, कुछ व्यक्तिगत या स्थानीय राजनीतिक व्यस्तताओं, जैसे कि हालिया राज्यसभा चुनावों के नामांकन और अन्य सांगठनिक कारणों से वे इस विशेष बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके थे, लेकिन उनके इस ताजा स्पष्टीकरण ने गठबंधन के भीतर किसी भी प्रकार की अनबन की अटकलों को पूरी तरह से विराम दे दिया है।