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ईस्टर संडे बम धमाका मामले में अदालत का फैसला आया

मामले के पंद्रह अभियुक्तों को जेल की सजा

भारतीय चेतावनी अनसुनी की थी

बसों में हथकड़ी पहनाकर लाया गया

कई अफसरों पर भी इसकी गाज गिरी है

कोलंबोः श्रीलंका की उच्च न्यायालय ने वर्ष 2019 में हुए भयावह ईस्टर संडे बम धमाकों की साजिश रचने के मामले में पंद्रह लोगों को दोषी करार देते हुए लंबी और कड़ी जेल की सजा सुनाई है। इस सिलसिलेवार और समन्वित आतंकवादी हमले में दो सौ सत्तर निर्दोष लोगों की जान चली गई थी और पाँच सौ से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कोलंबो की विशेष अदालत द्वारा जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, उनमें नौफर मौलवी भी शामिल है, जिसे सरकारी अभियोजकों द्वारा इस आत्मघाती बम धमाकों का मुख्य मास्टरमाइंड बताया गया था। इसके साथ ही, इस सनसनीखेज मामले में सुनवाई के बाद नौ अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है।

देश की राजधानी कोलंबो स्थित अदालत में चले इस लंबे मुकदमे के दौरान आरोपियों पर तेईस हजार से अधिक गंभीर आरोप तय किए गए थे, जिसके बाद मंगलवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें दो जेल बसों में हथकड़ी पहनाकर अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने अपने कड़े फैसले में इन पंद्रह दोषियों को दो सौ से लेकर दो सौ साठ साल तक के कारावास की लंबी सजा सुनाई है।

इसके अलावा, अदालत ने इन सभी दोषियों की चल और अचल संपत्ति को पूरी तरह से जब्त करने का भी आदेश दिया है। वर्ष 2009 में देश के गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद से श्रीलंका की धरती पर हुआ यह अब तक का सबसे घातक आतंकी हमला था, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। इन हमलों में मारे जाने वालों में पैंतालीस विदेशी नागरिक भी शामिल थे, जबकि अधिकांश पीड़ित श्रीलंकाई नागरिक थे जिनमें बड़ी संख्या में मासूम बच्चे भी थे।

इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों में सेलिब्रिटी शेफ शांता मायादुन्ने और उनकी बेटी, पाँच सदस्यों का एक पूरा युवा परिवार, निशाना बनाए गए होटलों के कम से कम आठ कर्मचारी और पश्चिमी श्रीलंकाई शहर नेगोम्बो के एक ही परिवार के पाँच सदस्य शामिल थे। विदेशी नागरिकों में ग्यारह भारतीय, आठ ब्रिटिश और पाँच अमेरिकी नागरिक अपनी जान गंवा बैठे थे। इसके अलावा, मृतकों में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, चीन, डेमार्क, जापान, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड और तुर्किए के नागरिक भी शामिल थे।

इन भीषण हमलों के तुरंत बाद श्रीलंकाई अधिकारियों ने इसे एक बड़ी खुफिया विफलता स्वीकार किया था, और संसद में यह बात सामने आई थी कि भारत की ओर से दी गई संभावित हमलों की अग्रिम चेतावनी को स्थानीय सुरक्षा तंत्र के साथ ठीक से साझा नहीं किया गया था।