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ऊर्जा संयंत्रों पर संघर्ष विराम को तैयार हैः जेलेंस्की

वैश्विक मंच पर पहली बार यूक्रेन का नया बयान

रूस ने अपने हमले तेज कर दिये हैं

यूक्रेन ने भी तेल भंडारों पर हमला किया

ट्रंप के साथ बैठक के बाद दिया बयान

संयुक्त राष्ट्रः यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि उनका देश रूस के साथ एक आंशिक संघर्ष विराम के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस संभावित समझौते के तहत दोनों पक्षों द्वारा केवल ऊर्जा बुनियादी ढाँचे (एनर्जी फैसिलिटीज) पर होने वाले हमलों को रोकने पर विचार किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण कूटनीति बयान न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के ठीक बाद सामने आया है।

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपनी प्रेस वार्ता में बताया कि इस प्रस्ताव के दायरे में संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र को शामिल किया जाएगा, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के पावर प्लांट और ग्रिड पर बमबारी बंद कर सकते हैं। यूक्रेन की तरफ से तैयार किए गए इस विशेष प्रस्ताव को अब अमेरिका के माध्यम से आधिकारिक रूप से रूसी पक्ष के पास भेजा जाएगा। हालांकि, इस दिशा में रूस की प्रतिक्रिया को लेकर अभी संशय बना हुआ है, क्योंकि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पहले ही इस तरह के आंशिक प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। रूस का रुख शुरू से ही किसी भी खंडित समझौते के बजाय एक व्यापक और समग्र शांति समझौते पर पहुँचने के प्रयासों पर केंद्रित रहा है।

इसी बातचीत के दौरान ज़ेलेंस्की ने यह भी विशेष रूप से स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें रूसी तेल उद्योग से जुड़े ठिकानों या अन्य सैन्य-आर्थिक लक्ष्यों पर हमले पूरी तरह रोकने के लिए नहीं कहा है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिका के भीतर बढ़ रही डीजल की कीमतों के लिए सीधे तौर पर रूसी रिफाइनरियों पर किए जा रहे यूक्रेनी ड्रोन हमलों को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बावजूद, ट्रंप की ओर से यूक्रेनी सेना को ऐसे हमलों से बाज आने का कोई प्रत्यक्ष निर्देश नहीं मिला है, जिससे कीव को अपने सामरिक अभियान जारी रखने की कूटनीतिक छूट मिलती दिख रही है।

अपनी इस अहम यात्रा और मुलाकातों के दौरान, यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अमेरिकी नेतृत्व के सामने पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलों की अतिरिक्त खेप भेजने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। हालांकि, इस संवेदनशील रक्षा आवश्यकता पर व्हाइट हाउस की ओर से कोई ठोस या पक्का जवाब नहीं मिला है। ज़ेलेंस्की ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब वैश्विक नेताओं के साथ किसी संवेदनशील सुरक्षा विषय पर चर्चा होती है, तो वे या तो स्पष्ट हाँ कह सकते हैं या फिर ना। उनके अनुसार, राहत की बात यह है कि अमेरिकी पक्ष की तरफ से किसी ने भी सीधे तौर पर ना नहीं कहा है, जिसका मतलब है कि बातचीत की गुंजाइश अभी भी जीवित है।