सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को साफ निर्देश दिये
मुनाफाखोरी के लिए खतरा नहीं उठाना
गलत बनाया है तो उसे पारित नहीं करें
अतिरिक्त शुल्क लेकर ऐसा नहीं कर सकते
राष्ट्रीय खबर
बेंगलुरुः सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक सरकार द्वारा शुरू की गई प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशियो योजना को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमलय बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया है कि प्रीमियम एफएआर का उपयोग किसी भी स्थिति में अनधिकृत और अवैध निर्माणों को नियमित करने के लिए नहीं किया जाएगा। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रीमियम एफएआर के तहत दी जाने वाली सभी मंजूरियां इस याचिका के अंतिम फैसले के अधीन होंगी। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
शीर्ष अदालत के समक्ष यह याचिका कर्नाटक नगर एवं देश योजना अधिनियम की धारा 18-बी के तहत लाई गई उस योजना को चुनौती देती है, जिसके तहत डेवलपर्स को अतिरिक्त शुल्क (प्रिमियम चार्ज) का भुगतान करके अतिरिक्त फर्श स्थान (फ्लोर स्पेस) खरीदने की अनुमति मिलती है। इससे पहले इस साल जून में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस योजना की वैधता को बरकरार रखा था, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सोंधी ने तर्क दिया कि सड़क की चौड़ाई को प्रीमियम एफएआर देने के लिए प्रभावी रूप से एकमात्र मानदंड बना दिया गया है, जिससे बेंगलुरु के पहले से ही कमजोर हो चुके बुनियादी नागरिक ढांचे (सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर) पर भारी बोझ पड़ रहा है।
वरिष्ठ वकील ने यह भी आशंका जताई कि इस योजना का दुरुपयोग ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण ढांचे के प्रावधानों के तहत अवैध संरचनाओं को नियमित करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना काफी हद तक उस विवादित अकरामा-सकरामा योजना जैसी ही है जिसे पहले अनधिकृत इमारतों को वैध बनाने के लिए लाया गया था।
हालांकि, ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन आरोपों का पुरजोर खंडन किया। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त करते हुए कहा, कोई भी अनधिकृत निर्माण जो अकरामा-सकरामा के दायरे में आता है, उसे इस योजना के तहत नियमित नहीं किया जाएगा। इसका उससे कोई लेना-देना नहीं है। कृपया मेरा यह बयान दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अतिरिक्त एफएआर मूल एफएआर के 0.6 तक सीमित है और यह अनिवार्य पार्किंग या सेटबैक नियमों में कोई छूट नहीं देता है। इस मामले की अगली सुनवाई अब से चार सप्ताह बाद तय की गई है।