मेघालय में अगले चुनाव तक यही सिंबल कायम रहेगा
मेघालय के प्रदेश अध्यक्ष का बयान
बंगाल में इसे अभी फ्रीज किया गया है
मेघालय इकाई में कोई विभाजन नहीं है
उत्तर पूर्व संवाददाता
गुवाहाटीः मेघालय तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष चार्ल्स पिंगग्रोप ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पार्टी के विधायक वर्ष 2028 तक तृणमूल कांग्रेस और उसके मौजूदा जोड़ा फूल घास चुनाव चिन्ह के साथ ही बने रहेंगे। यह बयान भारतीय निर्वाचन आयोग के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर उपजे विवाद के चलते अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित फूल और घास (जोड़ा घास फूल) चिन्ह को फिलहाल फ्रीज कर दिया है।
इस कदम को एक अंतिम नहीं बल्कि अस्थायी स्थिति करार देते हुए पिंगग्रोप ने कहा कि चुनाव आयोग ने यह निर्णय प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा पार्टी पर किए जा रहे दावों और पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम तथा अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के दौरान मतदाताओं के बीच किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति को टालने के लिए लिया है।
पार्टी अध्यक्ष ने संकेत दिया कि पश्चिम बंगाल के उपचुनाव संपन्न होने के बाद जब पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिक स्पष्टता सामने आएगी, तब मेघालय में टीएमसी के चुनाव चिन्ह के भविष्य का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के उपचुनाव के बाद मेघालय टीएमसी की एक अहम बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आगे की राजनीतिक रणनीति पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
चार्ल्स पिंगग्रोप ने दृढ़ता से कहा कि मेघालय टीएमसी के सभी विधायक पार्टी के मूल जोड़ा फूल घास चुनाव चिन्ह पर ही चुनकर आए हैं, और जब तक खुद मेघालय इकाई में कोई आंतरिक विभाजन नहीं होता, तब तक राज्य के इन चुने हुए जनप्रतिनिधियों के लिए इस चिन्ह को यूं ही समाप्त या फ्रीज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि वे वर्ष 2028 तक पार्टी के सभी विधायकों को पूरी तरह से एकजुट रखेंगे और पार्टी संगठन को मजबूत बनाए रखेंगे।
इस बीच, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनाव के लिए एक नए अंतरिम चुनाव चिन्ह—फुटबॉल खिलाड़ी (फुटबॉल प्लेयर)—का अनावरण किया है। इस नए अंतरिम प्रतीक के केंद्र में एक फुटबॉल खिलाड़ी को दर्शाया गया है, जिसके चारों ओर नीले रंग की पृष्ठभूमि में सफेद अक्षरों में ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस लिखा गया है। बहरहाल, मेघालय इकाई ने फिलहाल कानूनी और अंतिम फैसला आने तक अपनी पुरानी पहचान को ही कायम रखने का निर्णय लिया है।