एमएमडीआर और पाठ्यपुस्तक पर दो बार स्थगन
राष्ट्रीय खबर
भुवनेश्वरः मानसून सत्र के पहले दिन ही विपक्ष ने सरकार को घेर लिया। प्रश्नकाल शुरू होते ही सदन में ऐसा हंगामा हुआ कि विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। दिन की शुरुआत शोक प्रस्ताव से हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूर्व मंत्रियों और नेपाल बाढ़ में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी, नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने समर्थन किया। वंदे मातरम और राष्ट्रगान के बाद सदन शांतिपूर्ण लग रहा था। लेकिन प्रश्नकाल शुरू होते ही बीजद और कांग्रेस के विधायक हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर वेल में आ गए।
कांग्रेस विधायकों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 से ओडिशा के खनिज अधिकार और राजस्व को भारी नुकसान होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा – “यह कानून राज्य की तिजोरी पर डाका है, इसे तुरंत रद्द करना होगा।”
बीजद विधायकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की। आरोप है कि कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में गंभीर गलतियां हैं और सरकार 6 महीने तक सोती रही। अब सत्र से ठीक पहले खानापूर्ति के लिए 50 हजार किताबें बांटी जा रही हैं। विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक ने कहा, मंत्री ने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देते और नई किताबों की छपाई का पैसा सरकारी खजाने से वसूल नहीं होता, हम सदन नहीं चलने देंगे।
हंगामा इतना तेज था कि स्पीकर सुरमा पाढ़ी को पहले कार्यवाही 1.10 बजे तक और फिर 4 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 1.10 बजे जब डिप्टी स्पीकर भावानी शंकर भोई ने सदन शुरू किया तो एक मिनट में ही फिर स्थगित करना पड़ा।
विधानसभा के अंदर हंगामे के साथ ही बीजद ने बाहर भी ताकत दिखाई। विधानसभा के बाद बीजद विधायक सीधे महात्मा गांधी मार्ग पहुंचे, जहां पार्टी की छात्र और युवा शाखा पहले से ही विधानसभा घेराव आंदोलन कर रही थी।
भाजपा विधायक इराशिष आचार्य ने पलटवार करते हुए कहा, सरकार चर्चा के लिए तैयार है। कांग्रेस के एमएमडीआर पर नोटिस को हमने स्वीकार किया है, लेकिन विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। पाठ्यपुस्तकों में सुधार किया जा चुका है।
विधायक दल की बैठक में नवीन पटनायक ने ही तय किया था कि इस सत्र में एमएमडीआर, पाठ्यपुस्तक घोटाला और किसानों की समस्या पर सरकार को घेरा जाएगा। पहले दिन के हंगामे से साफ है कि विपक्ष इस बार सिर्फ सदन में नहीं, सड़क पर भी सरकार को घेरने की रणनीति पर है।