दुर्गा पूजा से पहले 20 फीसद बोनस की मांग उठाई
वर्ष 1951 की आधार सीमा को लेकर प्रदर्शन
अरुणाचल में 1.91 लाख वोटर कम हुए
खुर-मुंह की बीमारी से 267 मवेशी मरे
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी: मणिपुर की राजधानी इम्फाल में सोमवार रात एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इम्फाल पश्चिम जिले के कीशमपत के 10 इलाकों के स्थानीय क्लबों, निवासियों और मीरा पैबी (महिला मशालधारक) समूहों ने एक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि राज्य में किसी भी नई जनगणना से पहले 1951 को आधार वर्ष मानते हुए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को अपडेट किया जाए।
यह विरोध प्रदर्शन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया टिप्पणी के बाद भड़का, जिसमें उन्होंने मणिपुर में एनआरसी अपडेट करने के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाने के प्रस्ताव पर विचार करने के संकेत दिए थे। जुलूस जब कीशमथोंग होदाम लेइराक से शुरू होकर सिटी सेंटर की ओर बढ़ रहा था, तब भारी पुलिस बल ने इम्फाल हवाई अड्डे की सड़क पर कीशमपत जंक्शन पर इसे रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों ने स्वदेशी आबादी की सुरक्षा, जनसांख्यिकीय बदलावों पर चिंता और अवैध आव्रजन व घुसपैठ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक 1951 के रिकॉर्ड के आधार पर एनआरसी अपडेट नहीं होता, तब तक राष्ट्रीय जनगणना को स्थगित रखा जाना चाहिए।
दूसरी ओर, अरुणाचल प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 22 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई। राज्य में कुल 6,96,026 मतदाता दर्ज किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है।
अंतिम सूची में 3,43,709 पुरुष और 3,52,315 महिला मतदाता शामिल हैं, जबकि थर्ड-जेंडर के 2 मतदाता भी हैं। महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले 8,606 अधिक है। पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत एसआईआर से पहले की संख्या की तुलना में अंतिम सूची में करीब 1.91 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है, जिसकी जांच मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट प्रविष्टियों के सत्यापन के आधार पर की गई है।
असम और अरुणाचल से जुड़ी एक अन्य गंभीर खबर पशुओं से संबंधित है। अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में पिछले दो महीनों में खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) के कारण 267 मिथुनों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,402 जानवर इससे प्रभावित हुए हैं। यह बीमारी 21 गांवों में फैली है। राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट ऑफ फुट एंड माउथ डिजीज, ओडिशा की लैब जांच में इसकी पुष्टि सीरोटाइप ओ के रूप में हुई है। पशु चिकित्सा विभाग प्रभावित इलाकों में लगातार उपचार और निगरानी कर रहा है।
असम चाह मजदूर संघ (एसीएमएस) ने शारदीय दुर्गा पूजा से कम से कम तीन सप्ताह पहले पूरे राज्य के चाय बागान श्रमिकों को अधिकतम 20 फीसद बोनस देने की पुरजोर मांग की है। एसीएमएस महासचिव रूपेश गोवाला के नेतृत्व में हुई चर्चा के बाद, मैकलियोड रसेल इंडिया लिमिटेड, एपीपीएल, गुडरिक ग्रुप और एम.के. शाह जैसी कई प्रमुख चाय कंपनियों ने 22 सितंबर तक अपने श्रमिकों को 20 फीसद बोनस भुगतान के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यूनियन ने शेष बागानों से भी अपील की है कि वे जल्द से जल्द समझौता पूरा करें ताकि श्रमिकों को समय पर उनका हक मिल सके।