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आर्थिक तंगी की वजह से पुलिस के हत्थे चढ़ गया ईनामी नक्सली

असीम मंडल ससुराल से पैसे उधार लेने आया था

कई दशक से चकमा दे रहा था वह

अस्सी के दशक में माओवाद से जुड़े

लालगढ़ आंदोलन में नाम चर्चित हुआ

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः कोलकाता पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए प्रतिबंधित माओवादी संगठन के शीर्ष नेता और केंद्रीय समिति के सदस्य आकाश उर्फ असीम मंडल को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार तड़के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर इलाके में स्थित उनके ससुराल से पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए चेतावनी दी है कि राज्य में किसी भी कीमत पर लाल आतंकवाद को फिर से सिर उठाने नहीं दिया जाएगा। माओवादी संगठन के पतन के बाद जो गिने-चुने केंद्रीय कमेटी के नेता आत्मसमर्पण करने के बजाय लगातार छिपकर घूम रहे थे, उनमें 64 वर्षीय आकाश भी शामिल थे। झारखंड सरकार ने उन पर 1 करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार ने 1 करोड़ 20 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोणा स्थित फुलचक गांव के रहने वाले असिम मंडल 1980 के दशक से ही उग्र वामपंथी राजनीति में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। उन्होंने पहले पीपुल्स वार ग्रुप ज्वाइन किया था और बाद में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के गठन के बाद पश्चिम बंगाल तथा पड़ोसी राज्य झारखंड में संगठन के भीतर कई बड़े पदों की जिम्मेदारी संभाली।

साल 2008-09 के चर्चित लालगढ़ आंदोलन के दौरान भी उन्होंने संगठन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्ष 2010 में सुदीप चोंदार की गिरफ्तारी के बाद आकाश को पार्टी का राज्य सचिव बना दिया गया था। पोलित ब्यूरो के सदस्य कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी की मृत्यु के बाद उन्होंने मुख्य रूप से बंगाल से सटे झारखंड के पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ाई थीं।

हाल के वर्षों में जब उस क्षेत्र के एक के बाद एक एरिया कमांडरों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, तब आकाश ने कुछ समय के लिए सारंडा के जंगलों में एक अन्य शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा के पास शरण ली थी। कुछ दिन पहले जब मिसिर बेसरा भी गिरफ्तार हो गया, तब आकाश अपने छोटे से दस्ते के साथ राज्य में वापस लौटने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनके तीन साथी भी पकड़े गए।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, दस्ते के पास मौजूद सारा पैसा भी पुलिस के हाथ लग गया, जिससे आकाश पूरी तरह से कंगाल हो चुके थे। वह किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार नहीं थे और कुछ पैसों का इंतजाम करने के मकसद से ही पोटाशपुर स्थित अपने ससुराल पहुंचे थे। उनकी पत्नी भी माओवादी संगठन की सक्रिय सदस्य बताई जा रही हैं।

सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि कोलकाता पुलिस की एसटीएफ लंबे समय से इस रिश्तेदार के घर पर कड़ी नजर रखे हुए थी। जैसे ही आकाश वहां पहुंचे, इसकी भनक पुलिस को मिल गई और गुरुवार तड़के करीब तीन बजे उन्हें योजनाबद्ध तरीके से दबोच लिया गया।

हालांकि, पुलिस के कुछ अधिकारी उन्हें आत्मसमर्पण के विकल्प पर विचार करने का सुझाव दे रहे हैं, लेकिन आकाश इसके लिए साफ इनकार कर चुके हैं। पुलिस ने उनके पास से कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक दस्तावेज और किताबें भी बरामद की हैं। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठन एपीडीआर के रंजित शूर ने आकाश को तुरंत अदालत में पेश करने और उन्हें एक राजनीतिक कैदी का दर्जा दिए जाने की मांग की है।