प्रयागराज में बाढ़ का खतरा: गंगा-यमुना में उफान के बाद रेड अलर्ट जारी, 24 घंटे में 1 मीटर बढ़ा जलस्तर
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): राज्य में लगातार जारी मूसलाधार मानसूनी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। मौसम विभाग द्वारा अगले एक सप्ताह तक भारी बारिश की संभावना जताए जाने के बीच प्रयागराज में गंगा और यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने जिले में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि अगले दो दिनों में जलस्तर में और अधिक तीव्र वृद्धि हो सकती है। रविवार को महज आठ घंटों के भीतर दोनों नदियों में 26 से 40 सेंटीमीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पिछले 24 घंटों में जलस्तर 1 मीटर तक बढ़ चुका है।
📏 खतरे के निशान और चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचा पानी: आंकड़े और स्थिति
जलस्तर के प्रमुख आंकड़े:
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खतरे का निशान: प्रयागराज में खतरे का निशान 84.734 मीटर और चेतावनी बिंदु (Warning Level) 83.73 मीटर निर्धारित है।
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वर्तमान अंतर: गंगा नदी चेतावनी बिंदु से महज 1.57 मीटर और यमुना नदी 1.71 मीटर नीचे बह रही है।
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तटबंध सुरक्षित: यद्यपि वर्तमान में दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे हैं और सभी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं, परंतु जलस्तर में वृद्धि की गति को देखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों और प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं।
🛣️ रिवर फ्रंट रोड डूबी: नालों के जरिए रिहायशी व ग्रामीण इलाकों में घुसा पानी
धरातलीय प्रभाव और जलभराव:
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सड़कें जलमग्न: गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण गंगा किनारे स्थित रिवर फ्रंट रोड पूरी तरह पानी में डूब गई है।
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रिहायशी इलाकों पर असर: बैकवाटर और उफनाते नालों के रास्ते पानी अब निचले व तटीय मोहल्लों में प्रवेश करने लगा है।
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ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित: संगम नगरी के आस-पास के कई ग्रामीण इलाकों और कछारी गांवों में धीरे-धीरे बाढ़ का पानी फैलना शुरू हो गया है।
🚨 संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी: प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
सुरक्षा व्यवस्था और एहतियाती कदम:
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संगम क्षेत्र में निगरानी: हालात की गंभीरता को देखते हुए संगम क्षेत्र और दोनों नदियों के तटवर्ती इलाकों में पुलिस व प्रशासन की चौकसी बढ़ा दी गई है।
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राहत चौकियों को अलर्ट: बाढ़ प्रभावित संभावित निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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कंट्रोल रूम सक्रिय: प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।