रूढ़ियों को तोड़ा: बुरहानपुर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटी ने मां को दी मुखाग्नि, पति के सपोर्ट से निभाया फर्ज
बुरहानपुर (मध्य प्रदेश): पुणे में एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में कार्यरत 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटी हर्षा गणेश पतंगे ने अपनी मां के निधन पर सामाजिक रूढ़ियों को दरकिनार करते हुए बेटे का फर्ज निभाया।
मां जयश्री अनिल रुपेरी के निधन के बाद जब हर्षा ने अर्थी को कंधा देने और अंतिम संस्कार में मुखाग्नि देने की इच्छा जताई, तो परिजनों और रिश्तेदारों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का हवाला देकर इसका विरोध किया। इकलौती संतान होने के नाते हर्षा हर हाल में अपनी मां को दिया वचन पूरा करना चाहती थीं।
इस भावुक मोड़ पर हर्षा को अपने पति गणेश पतंगे का मजबूत सहारा मिला। पति ने उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा, “मैं आपकी भावनाओं की पूरी कद्र करता हूं और हर कदम पर आपका साथ दूंगा।” पति के इस अटूट समर्थन के बाद हर्षा ने लालबाग थाना क्षेत्र स्थित सिंधी बस्ती श्मशान घाट पर पूरे विधि-विधान से मां की चिता को मुखाग्नि दी।
💔 श्मशान घाट पर भावुक हुआ माहौल: बेटी के साहस को देखकर नम हुईं सबकी आंखें
अंतिम संस्कार का दृश्य और सामाजिक संदेश:
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भावुक क्षण: सिंधी बस्ती श्मशान घाट पर जब बेटी ने अंतिम संस्कार की मुख्य रस्में निभाईं, तो वहां उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
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पारिवारिक पृष्ठभूमि: 52 वर्षीय जयश्री और 59 वर्षीय अनिल रुपेरी की इकलौती संतान हर्षा हैं। हर्षा के पिता पहले गार्ड की नौकरी करते थे और अब घर पर ही रहते हैं।
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बराबरी का संदेश: उपस्थित नागरिकों ने हर्षा के इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समाज में बेटा-बेटी की समानता का एक सशक्त संदेश दिया है।
🤝 विरोध के बाद समाज ने भी दिया समर्थन: ‘बेटियां किसी से कम नहीं’
परिजनों की समझाइश और समाज का रुख:
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शुरुआती हिचकिचाहट: आरंभ में कुछ रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए बेटी द्वारा मुखाग्नि दिए जाने पर आपत्ति जताई थी।
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पति की समझाइश: हर्षा के पति द्वारा स्थिति और भावनात्मक महत्व को समझाने के बाद सभी लोग सहमत हो गए और उन्होंने खुले दिल से बेटी के इस फैसले का समर्थन किया।
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बदलती सोच: उपस्थित लोगों ने स्वीकार किया कि आज के दौर में बेटियां हर क्षेत्र में आगे हैं और माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभा रही हैं।
🗣️ ‘मां ने हमेशा हौसला बढ़ाया, बेटे की कमी नहीं खलने दी’: हर्षा पतंगे
अंतिम संस्कार के बाद बेटी का भावुक बयान:
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माता-पिता का संघर्ष: हर्षा ने बताया कि माता-पिता की इकलौती संतान होने के कारण उन्हें बड़े लाड़-प्यार और उच्च संस्कारों के साथ पाला गया। उन्हें पढ़ा-लिखाकर पुणे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के काबिल बनाया गया।
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मां का योगदान: उन्होंने कहा कि मां जयश्री ने जीवन के हर उतार-चढ़ाव में उनका साथ दिया और उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
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फर्ज का निर्वहन: हर्षा ने कहा, “मां के चले जाने से मैं अंदर से टूट गई थी, लेकिन बेटे के अभाव में अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी खुद निभाने का संकल्प मैंने लिया और मां को शांतिपूर्वक विदाई दी।”