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एम्स भोपाल में स्वास्थ्य सुविधाओं का महा-विस्तार: नवंबर से रोबोटिक सर्जरी, ₹7500 में PET-CT और फेफड़ा ट्रांसप्लांट की तैयारी

भोपाल (मध्य प्रदेश): राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Bhopal) में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए आधुनिक चिकित्सा और जांच सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

अस्पताल में प्रतिदिन 6 से 7 हजार मरीज ओपीडी में परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि लगभग एक हजार मरीज प्रतिदिन विभिन्न विभागों में भर्ती होते हैं। मरीजों को किफायती और विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने के लिए संस्थान में रोबोटिक सर्जरी, दूसरी कैथ लैब, 3-टेस्ला एमआरआई, पीईटी-सीटी, गामा नाइफ और फेफड़ा प्रत्यारोपण जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। यह जानकारी एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल ने दी।

🫀 26 गुर्दा और 3 हृदय प्रत्यारोपण सफल: अब फेफड़ा और लिवर ट्रांसप्लांट की बारी

अंग प्रत्यारोपण में संस्थान की उपलब्धियां:

  • मध्य प्रदेश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट: एम्स भोपाल में अब तक 3 हृदय और 26 गुर्दा (किडनी) प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।

  • फेफड़ा प्रत्यारोपण को मंजूरी: लंग ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक विधिक व चिकित्सकीय अनुमतियां मिल चुकी हैं और इसकी सेवाएं शीघ्र आरंभ की जाएंगी।

  • समर्पित ओटी: लिवर ट्रांसप्लांट की तैयारियों के साथ ही ट्रांसप्लांट सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अत्याधुनिक डेडिकेटेड ट्रांसप्लांट ऑपरेशन थिएटर तैयार किया गया है।

🤖 नवंबर 2026 से शुरू होगी दा विंची रोबोटिक सर्जरी: दूसरी MRI और कैथ लैब भी तैयार

आधुनिक सर्जिकल तकनीक और डायग्नोस्टिक्स:

  • रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम: संस्थान में ‘दा विंची’ रोबोटिक सर्जिकल प्रणाली स्थापित की जा रही है, जिसके नवंबर 2026 तक पूरी तरह क्रियाशील होने की संभावना है। इससे यूरोलॉजी सहित अन्य विभागों में मिनिमल इनवेसिव (कम चीरे वाली) सर्जरी संभव होगी।

  • नई जांच मशीनें: मरीजों की लंबी वेटिंग लिस्ट को कम करने के लिए दूसरी 3-टेस्ला एमआरआई और एक अतिरिक्त कैथ लैब भी स्थापित की जा रही है।

🎗️ कैंसर मरीजों के लिए ₹7,500 में PET-CT जांच: 200 बेड का डेडिकेटेड कैंसर सेंटर प्रस्तावित

ऑन्कोलॉजी विंग का विस्तार:

  • दूसरा लिनैक (Linac): रेडियोथेरेपी की क्षमता में वृद्धि और प्रतीक्षा समय को घटाने के लिए दूसरा लीनियर एक्सीलरेटर स्थापित किया जा रहा है।

  • पीईटी-सीटी और गामा नाइफ: पीईटी-सीटी जांच की सुविधा 30 नवंबर 2026 तक लगभग ₹7,500 के किफायती शुल्क पर उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि ब्रेन ट्यूमर के सटीक इलाज हेतु गामा नाइफ मार्च 2027 तक शुरू होगा।

  • कैंसर अस्पताल: 200 बिस्तरों वाले स्वतंत्र डेडिकेटेड कैंसर सेंटर का विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

📱 24 घंटे व्हाट्सएप सेवा और डिजिटल समाधान: घर बैठे मिलेगी ओपीडी पर्ची व रिपोर्ट

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं:

  • स्मार्ट ओपीडी सेवाएं: मरीजों को अस्पताल के अनावश्यक चक्कर लगाने से बचाने के लिए 24 घंटे सक्रिय रहने वाली व्हाट्सएप आधारित सेवा शुरू की गई है, जिससे अपॉइंटमेंट बुकिंग, लैब रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी प्राप्त की जा सकती है।

  • डिजिटल सर्टिफिकेट: जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र 72 घंटे के भीतर ऑनलाइन डाउनलोड किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त रेडियोलॉजी और इमेजिंग के लिए उन्नत पैक्स (PACS) प्रणाली लाई जा रही है।

🏢 700 बिस्तरों का विश्राम गृह और आईआईटी इंदौर के सहयोग से ‘मरीज मार्गदर्शन केंद्र’

परिसर विकास और जनसुविधाएं:

  • विश्राम गृह व पार्किंग: मरीजों के तीमारदारों के लिए 700 बिस्तरों वाला आधुनिक विश्राम गृह निर्माणाधीन है। नया सार्वजनिक पार्किंग परिसर तैयार हो चुका है, जिसके ऊपर मल्टी-स्पेशियलिटी ब्लॉक बनाने की योजना है।

  • नेविगेशन व गाइडेंस: विशाल परिसर में रास्ता खोजने में होने वाली असुविधा को दूर करने के लिए आईआईटी इंदौर के तकनीकी सहयोग से एक डिजिटल पेशेंट गाइडेंस सेंटर विकसित किया जा रहा है।

🔬 चिकित्सा शोध में भी एम्स ने बनाई पहचान: 60 प्रोजेक्ट्स और 25 पेटेंट

अनुसंधान एवं नवाचार:

  • फंडेड प्रोजेक्ट्स: वर्ष 2025-26 के दौरान एम्स भोपाल को करीब 60 बाह्य वित्तपोषित शोध परियोजनाओं के लिए अनुदान प्राप्त हुआ।

  • पेटेंट और रिसर्च पेपर्स: संस्थान के विशेषज्ञ प्रतिवर्ष 450 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित कर रहे हैं और अब तक 25 पेटेंट दाखिल या स्वीकृत हो चुके हैं। इनका मुख्य उद्देश्य कम लागत वाली स्वदेशी चिकित्सा तकनीकों का विकास करना है।