प्याज की कीमतें अस्सी रुपये किलोग्राम तक
सरकार ने कहा था दाम घटेंगे
खुले बाजार में लगातार बढ़ोत्तरी
चीनी की तरह नकली कमी बनायी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अगस्त के महीने में प्याज की कीमतें कम रहने से खुदरा विक्रेताओं को मुनाफा हुआ, लेकिन अब कई राज्यों में प्याज की भारी किल्लत देखी जा रही है। यह स्थिति कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए किए गए सरकारी प्रयासों के विफल होने के बाद पैदा हुई है। दिल्ली-एनसीआर में खुदरा प्याज 50-55 रुपये प्रति किग्रा बेचा जा रहा है, जबकि खुले बाजार में यह 60-70 रुपये तक पहुंच गया है। कुछ राज्यों में प्याज की कीमत 80 रुपये प्रति किग्रा तक उछल चुकी है।
कानपुर की चकरपुर मंडी में प्याज की आवक 6.50 लाख किग्रा से घटकर 5 लाख किग्रा रह गई है, जिससे थोक भाव 42-45 रुपये प्रति किग्रा तक बढ़ गए हैं। व्यापारी संघ के अनुसार, पिछले तीन दिनों में ही कीमतों में करीब 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल मध्य प्रदेश के शिवपुरी और राजस्थान के अलवर से सीमित मात्रा में प्याज आ रहा है। आगरा की सिकंदरा मंडी में नासिक से रोजाना करीब 15 ट्रक प्याज (3 लाख किग्रा) आ रहा है, जहां थोक भाव 40 रुपये प्रति किग्रा के आसपास है।
बंगाल में पिछले दो हफ्तों में प्याज के दाम 30-35 रुपये से बढ़कर 70-80 रुपये हो गए हैं। राजस्थान में यह 50 रुपये, जम्मू और देहरादून में 60 रुपये तथा हरिद्वार में 50 रुपये प्रति किग्रा बिक रहा है।
संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक और भंडारण व्यवस्था को मजबूत किया है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार, पहली बार सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को प्याज के भंडारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बफर स्टॉक के 30 प्रतिशत प्याज सड़ने की खबरों को खारिज करते हुए गुणवत्ता को बेहतर बताया।
शुक्रवार को नासिक से 453.65 टन प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस ट्रेन दिल्ली पहुंची, ताकि प्रमुख खपत केंद्रों में आपूर्ति बढ़ाई जा सके। इस प्याज को दिल्ली-एनसीआर में 35 रुपये प्रति किग्रा की सब्सिडी दर पर बेचा जाएगा। हालांकि, रिपोर्टों से पता चलता है कि असली समस्या प्याज की कमी नहीं, बल्कि बेमौसम बारिश और भंडारण के दौरान हुआ नुकसान है।