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प्याज और चीनी के दाम सरकार पर अतिरिक्त बोझ

सरकार की घोषणा के बाद भी कीमतों में बढ़ोत्तरी का दौर जारी

सरकार का दावा पर्याप्त स्टॉक है

दाम कई गुणा बढ़ गये हैं इनदिनों

सरकार से जनता होती है नाराज

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आगामी त्यौहारी सीजन से ठीक पहले दो प्रमुख रसोई सामग्रियां—प्याज और चीनी—आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं, जिससे देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया पर आसमान छूती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि गरीब और मध्यम वर्ग अपनी दैनिक जरूरतों को कैसे पूरा करें। रमेश ने कहा, चीनी के बाद अब प्याज भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रहा है। महज एक महीने में प्याज के दाम 76 फीसदी तक बढ़ गए हैं, राज्यों में थोक दरें दोगुनी हो गई हैं और सरकार का बफर स्टॉक खाली पड़ा है। दूध, तेल, फल और राशन—सब कुछ आम आदमी के लिए महंगा होता जा रहा है।

सरकार ने भी यह स्वीकार किया है कि हाल के हफ्तों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, सरकार ने स्थिति पर कड़ी नजर रखने और कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। सरकार ने चीनी की कीमतों में हुई हालिया वृद्धि को एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के विचलन से जोड़ने को गलत बताया है।

आगामी त्यौहारों और अगले साल होने वाले महत्वपूर्ण चुनावों को देखते हुए इन दोनों आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि भाजपा नीत केंद्र सरकार के लिए संवेदनशील समय पर आई है। प्रमुख उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र में खराब मौसम, देरी से आए मानसून और खरीफ फसल के नुकसान के कारण प्याज उत्पादन में गिरावट आई है। आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे शहरों के लिए कांदा एक्सप्रेस ट्रेनें चलाकर आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

चीनी के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सरकार ने खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने और उपलब्धता बनाए रखने के लिए कच्चे चीनी के अस्थायी आयात सहित कई कदम उठाए हैं। उन्होंने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण गन्ने में लाल सड़न बीमारी और अत्यधिक बारिश से हुए जलभराव को बताया। हालांकि, आलोचक सरकार की चीनी नीति, किसानों के बकाया भुगतान और एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।