अभिषेक बनर्जी की याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष चुप्पी साध गये थे
दोनों सदनों के अध्यक्षों को नोटिस जारी नहीं किया
गुमनाम पार्टी एनसीपीआई में शामिल हुए हैं सभी
तीन सदस्यों वाली खंडपीठ ने यह फैसला लिया
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः तृणमूल कांग्रेस के भीतर छिड़े अंदरूनी राजनीतिक संकट और अयोग्यता की कार्यवाही में हो रही देरी का मामला अब देश की शीर्ष अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। नेशनल सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ हाथ मिलाने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी लोकसभा सदस्यों की अयोग्यता याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष द्वारा जल्द से जल्द निर्णय लेने की मांग को लेकर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सभी 20 बागी सांसदों को औपचारिक नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर विचार किया और बागी सांसदों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और सदन के महासचिव को अलग से औपचारिक नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह फैसला तब लिया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के सामने पेश होकर यह स्पष्ट किया कि वह अदालत में लोकसभा अध्यक्ष और सचिवालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए स्वयं उपस्थित हैं।
अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि बागी सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर निर्णय लेने में अनावश्यक देरी की जा रही है, जो कि संसदीय मानदंडों और दल-बदल विरोधी कानून की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह लोकसभा अध्यक्ष को एक निश्चित समय सीमा के भीतर इस मामले पर फैसला सुनाने का निर्देश दे।
यह पूरा राजनीतिक और कानूनी विवाद टीएमसी के संसदीय दल के भीतर उस समय उत्पन्न हुआ, जब उसके 20 लोकसभा सदस्यों ने अचानक बागी रुख अख्तियार कर लिया। इन सांसदों ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वे त्रिपुरा स्थित एक क्षेत्रीय राजनीतिक संगठन नेशनल सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए हैं या उन्होंने अपने समूह का इसमें विलय कर लिया है। इसके साथ ही इन बागी सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष से सदन में उन्हें एक अलग और स्वतंत्र गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की थी, जिसके बाद टीएमसी ने उनकी सदस्यता रद्द करने के लिए अयोग्यता याचिका दायर की थी।