आईसीसी अध्यक्ष अकाने पर प्रतिबंध लगाया गया
हेगः अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। वाशिंगटन द्वारा हेग स्थित विश्व अदालत की जापानी अध्यक्ष तोमोको अकाने और एक वरिष्ठ अभियोजक पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। विश्व अदालत ने अमेरिका के इस कदम को सीधे तौर पर कानून के शासन को कमजोर करने वाला और वैश्विक कानूनी व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा करार दिया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम उन अधिकारियों के खिलाफ उठाया गया है जो ऐसी सरकारों के तहत अधिकारियों की जांच, गिरफ्तारी या अभियोजन में शामिल हैं, जिन्होंने आईसीसी के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका का यह रुख मुख्य रूप से उसके सहयोगी देश इजराइल और अमेरिकी सैन्य कर्मियों के खिलाफ आईसीसी द्वारा की जा रही जांच के जवाब में सामने आया है।
अमेरिका और इजराइल दोनों ही आईसीसी की स्थापना करने वाले रोम संविधि के हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं, जिसके कारण वाशिंगटन इस अदालत के फैसलों को अवैध और राजनीति से प्रेरित मानता है।
अमेरिका द्वारा शीर्ष न्यायाधीशों और कानूनी अधिकारियों को निशाना बनाए जाने के बाद अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने एक सख्त बयान जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब न्याय के प्रहरियों और न्यायिक अभिनेताओं को कानून लागू करने के लिए डराया-धमकाया जाता है, तो पूरी अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था खतरे में पड़ जाती है। मानवाधिकार संगठनों और कई अन्य देशों ने भी अमेरिकी प्रशासन की इस कार्रवाई की आलोचना की है, क्योंकि इससे युद्ध अपराधों के पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन ने अपनी इस नीति को सही ठहराते हुए कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए इस “राजनीतिक और भ्रष्ट अदालत” के खिलाफ अपनी कूटनीतिक और आर्थिक पाबंदियों का दायरा और अधिक बढ़ाएगा। इस टकराव ने वैश्विक राजनीति में एक बार फिर अमेरिका और बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच गहरी खाई को उजागर कर दिया है।