छह माह पहले से ही तोड़ जोड़ का खेल हो गया शुरू
राष्ट्रपति भवन से राजभवन तक पैरवी
अंतिम तीन नामों की सूची में शामिल
सभी के साथ काम कर चुके हैं वह
राष्ट्रीय खबर
रांची: देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी एनटीपीसी के अगले चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक के चयन की प्रक्रिया ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इस उच्च पद के लिए शुरू हुई रेस में झारखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नितिन मदन कुलकर्णी का नाम भी मजबूती से उभरकर सामने आया है। अंदरखाने से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया के अंतिम दौर में शॉर्टलिस्ट किए गए शीर्ष तीन नामों की सूची में उनका नाम शामिल बताया जा रहा है।करीब छह महीने बाद की प्रक्रिया में अभी से ही यह सक्रियता अजीब है।
नितिन मदन कुलकर्णी की इस मजबूत दावेदारी के पीछे उनके प्रशासनिक अनुभव और राजभवन के साथ उनके लंबे व प्रगाढ़ संबंधों को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने झारखंड के राजभवन में विभिन्न शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे शख्सियतों के साथ बेहद नजदीकी से काम किया है। सूत्रों के अनुसार, वह वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, वर्तमान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और वर्तमान राज्यपाल संतोष गंगवार के प्रधान सचिव या महत्वपूर्ण दायित्वों के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
चर्चा है कि राष्ट्रपति भवन से लेकर झारखंड राजभवन तक के उच्चे स्तरों से उनके पक्ष में मजबूत पैरवी भी की गई है। हालांकि, इस तरह के तमाम कयासों और राजनीतिक-प्रशासनिक सिफारिशों के बीच यह बात भी उतनी ही स्पष्ट है कि एनटीपीसी जैसे महारत्न उपक्रम के शीर्ष पद पर अंतिम फैसला इन पैरवियों के आधार पर नहीं होना है।
प्रशासनिक और सरकारी संस्थानों में शीर्ष नियुक्तियों के मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी अपने सख्त और पारदर्शी मानदंडों के लिए जानी जाती है। यह जोड़ी हर नियुक्ति को अपनी कसौटी पर परखती है। ऐसे में, इस उच्च स्तरीय कसौटी पर आईएएस नितिन मदन कुलकर्णी की कार्यशैली और प्रशासनिक विजन कितना खरा उतरता है, इसे लेकर फिलहाल प्रशासनिक हलकों में कोई भी सटीक अनुमान लगा पाना मुश्किल साबित हो रहा है।
भले ही वर्तमान सीएमडी गुरदीप सिंह को दिसंबर माह तक का सेवा विस्तार मिलने के बाद इस पद की दौड़ से जुड़ी चर्चाएं कुछ समय के लिए ठंडी पड़ गई थीं, लेकिन पर्दे के पीछे की गतिविधियां और सुगबुगाहटें एक बार फिर तेज हो गई हैं। यह हलचल मुख्य रूप से दिसंबर माह के बाद के संभावित प्रशासनिक फेरबदल और नई नियुक्तियों को ध्यान में रखकर है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या शीर्ष नेतृत्व की हरी झंडी नितिन मदन कुलकर्णी के नाम पर मिलती है या फिर यह बाजी किसी अन्य दावेदार के हाथ लगती है।