मणिपुर के कांगपोकपी में आग से चार घर चले
फायरिंग में घायलों में सात की हालत गंभीर
कांगपोकपी में 1.35 करोड़ की संपत्ति नष्ट हुई
सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी पर जवाब देने का निर्देश दिया
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी: असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर स्थित धेमाजी जिले के मिंगमांग बस्ती इंटर-स्टेट बॉर्डर पर अरुणाचल प्रदेश के अज्ञात उपद्रवियों द्वारा की गई गोलीबारी से भारी तनाव फैल गया है। ज़मीन पर कथित कब्जे और अतिक्रमण के विवाद को लेकर हुई इस हिंसक झड़प में असम के आठ ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इनमें से सात की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें गोगामुख ग्रामीण अस्पताल से बेहतर इलाज के लिए धेमाजी सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य पुलिस इस स्थिति को शांत करने के लिए पूरी मुस्तैदी से काम करे, लेकिन असम अपनी एक इंच भी ज़मीन नहीं गंवाएगा। उन्होंने बताया कि दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक आपसी तालमेल बिठाकर तनाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं और मौके पर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।
दूसरी ओर, मणिपुर के कांगपोकपी में एक भीषण आगजनी की घटना ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है। 8-9 अगस्त की दरमियानी रात एक आवासीय परिसर में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और एक पारिवारिक मकान के साथ-साथ तीन अन्य किराए के घरों को भी पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और भूमि दस्तावेजों के अलावा लगभग 1.34 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जलकर राख हो गई। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन को अपनी लिखित शिकायत सौंप दी है।
इन सबके बीच, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने असम के अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को अगस्त 2019 में प्रकाशित अंतिम एनआरसी सूची में शामिल करीब 3.11 करोड़ लोगों को आधिकारिक पहचान पत्र जारी करने से जुड़ी याचिकाओं पर केंद्र और असम सरकार से औपचारिक जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ जमीयत उलेमा-ए-हिंद, आमसू और अन्य संगठनों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि अंतिम सूची जारी होने के बावजूद कई प्रक्रियात्मक कदम अधूरे हैं, जिनमें एनआरसी से बाहर रहे लगभग 19 लाख लोगों को अस्वीकृति पर्ची न दिया जाना शामिल है, जिससे कानूनी अपील की प्रक्रिया बाधित हो रही है। अदालत ने एनआरसी के पूर्व समन्वयक हितेश देव सरमा की उस याचिका को भी मौजूदा मामलों के साथ टैग कर दिया है, जिसमें सूची के नए सिरे से सत्यापन की मांग की गई है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई तय की है।