प्रधानमंत्री ने इलाके के बदलाव को रेखांकित किया
सातवीं वर्षगांठ पर पीएम ने भाषण दिया
राज्य का चौतरफा विकास हो रहा है अब
पूर्ण राज्य की मांग अब भी जारी रहेगी
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: वर्ष 2019 में ऐतिहासिक अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के पूरे सात वर्ष बीत जाने के बाद, देश के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शुमार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य के केंद्र में आ गए हैं। इस सातवीं वर्षगांठ के अवसर पर केंद्र सरकार के विकास के दावों और क्षेत्रीय राजनीतिक नेतृत्व की ओर से पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग के बीच तीखी बहस छिड़ गई है, जिससे यह मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन और विभिन्न माध्यमों से रेखांकित किया है कि अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के आम जनजीवन में अभूतपूर्व और व्यापक सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पिछले सात वर्षों के दौरान इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में सड़क मार्ग, परिवहन, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी संरचनाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, वहां के युवाओं और नागरिकों के लिए शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, स्टार्टअप और उद्यमिता के साथ-साथ खेलकूद के क्षेत्रों में विकास के नए और सुनहरे अवसर सृजित हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इन दोनों क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह संकल्पित है ताकि वहां का प्रत्येक नागरिक ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन में अपनी सक्रिय और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित कर सके।
एक तरफ जहां केंद्र सरकार इन क्षेत्रों को देश की मुख्यधारा से जोड़कर प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के प्रशासनिक और विकासपरक दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय राजनीतिक मोर्चे पर पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग बेहद मुखर होती जा रही है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को एक तीखे और स्पष्ट बयान में कहा कि उनकी सरकार और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए अपने राजनीतिक व लोकतांत्रिक प्रयास तब तक पूरी ताकत से जारी रखेंगे, जब तक कि यह लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब बुधवार को ही जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग को लेकर व्यापक सार्वजनिक प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिली थीं। जनता की इन्हीं बढ़ती आकांक्षाओं और विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए श्री अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर इस दिशा में अपने कदम लगातार उठाती रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर की पूरी राजनीति इन्हीं दो धुरों—यानी केंद्र के विकासपरक प्रशासनिक दावों और क्षेत्रीय दलों की ओर से पूर्ण राज्य के दर्जे की राजनीतिक मांग—के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रहने की पूरी संभावना है।