पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई में लापता व्यक्ति का मैनेजर पकड़ाया
मूल अभियुक्त अभी फरार चल रहा है
उसके विदेश में होने की अधिक संभावना
फर्जी रसीद भी छापा करता था यह रैकेट
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः पत्थर व्यवसायी टुलु मंडल के मैनेजर सतेष प्रामाणिक की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे अवैध कारोबार से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं। पुलिस ने सतेष को मैराथन पूछताछ के बाद एक ऐसी डायरी बरामद की है, जिसमें कई प्रशासनिक अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। इस खुलासे के बाद अब यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या ये अधिकारी टुलु मंडल के अवैध पत्थर कारोबार और फर्जी डीसीआर रैकेट को संरक्षण दे रहे थे या नहीं।
डायलरी में अधिकारियों के नाम और फर्जी रसीद छापने की मशीन बरामद सीउड़ी अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील विभास चट्टोपाध्याय ने सनसनीखेज जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी मैनेजर सतेष प्रामाणिक की निशानदेही और पूछताछ के आधार पर एक डायरी हाथ लगी है। इस डायरी में प्रशासन के कई अधिकारियों के नाम लिखे हुए हैं। इसके साथ ही पुलिस ने पत्थर की अवैध ढुलाई और तस्करी में इस्तेमाल होने वाली फर्जी डीसीआर रसीदें छापने वाली एक मशीन भी बरामद की है। अधिकारियों का मानना है कि इन जाली रसीदों के दम पर ही बड़े पैमाने पर पत्थरों की अवैध खेप भेजी जाती थी।
अब तक 220 करोड़ की संपत्ति जब्त बीरभूम के पुलिस अधीक्षक विदित राज बुंदेश ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस अब तक फरार चल रहे टुलु मंडल की करीब 220 करोड़ रुपये की संपत्ति को फ्रीज कर चुकी है। इस भारी-भरकम राशि में टुलु के बहनोई ममिनर मंडल के आवास से बरामद किए गए करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के जेवरात और नकदी भी शामिल है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, टुलु मंडल देश से बाहर बैठकर ही अपने इस पूरे साम्राज्य को संचालित कर रहा था।
अनुव्रत मंडल के करीबी माने जाने वाले टुलु मंडल पर लंबे समय से अवैध तरीके से पत्थर का कारोबार चलाने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। जांच एजेंसियों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि इस अवैध कारोबार के इतनी तेजी से फलने-फूलने के पीछे पुलिस और प्रशासन के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की सीधी मिलीभगत रही है।
इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब गत 24 जुलाई को मोहम्मद बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत भूमि और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने एक पत्थर लदे डंपर के दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि लॉरी चालक द्वारा जो डीसीआर दिखाई गई थी, उसका नंबर सरकारी रजिस्टरों में दूर-दूर तक दर्ज नहीं था। इसके बाद भूमि राजस्व विभाग की लिखित शिकायत पर मोहम्मद बाजार थाने में फर्जी डीसीआर को लेकर एक नई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई। पुलिस संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में इस नए मामले में भी टुलु मंडल और उसके गुर्गों को औपचारिक रूप से जोड़ा जाएगा। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि इस अवैध नेटवर्क की जड़ें प्रशासनिक तंत्र में कहां तक फैली हुई हैं।