भाजपा का तीस साल पुराना किला इस बार ढह गया
अजेय गढ़ में बदलाव की आंधी
जनता का जनादेश भाजपा को संदेश
राजद प्रत्याशी को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ
राष्ट्रीय खबर
पटनाः बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन एक अप्रत्याशित सियासी उलटफेर का गवाह बना। राजधानी पटना की अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव के नतीजों ने प्रदेश के स्थापित राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। इस चुनावी संग्राम में ‘जन सुराज’ के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने विजय पताका फहराते हुए भारतीय जनता पार्टी के तीन दशक पुराने अजय किले को ध्वस्त कर दिया है।
मतगणना की शुरुआत से ही प्रशांत किशोर ने अपने प्रतिद्वंद्वियों—बीजेपी और आरजेडी—पर जो बढ़त बनाई, वह अंतिम दौर तक बरकरार रही। 32 राउंड की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर को कुल 63,946 वोट प्राप्त हुए, जबकि दूसरे स्थान पर रहे बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा को 44,700 मतों से ही संतोष करना पड़ा। इस प्रकार प्रशांत किशोर ने 19,246 वोटों के बड़े अंतर से यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की। वहीं, आरजेडी की उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता 14,241 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
इस उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट की जीत के रूप में नहीं, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन की साख के बड़े इम्तिहान के तौर पर देखा जा रहा था। बीजेपी ने इस गढ़ को बचाने के लिए अपने तमाम दिग्गज नेताओं और स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया था, लेकिन जन सुराज की जमीनी पकड़ और जनता के सीधे जुड़ाव के सामने कोई भी राजनीतिक रणनीति काम न आ सकी। विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर का यह परिणाम स्पष्ट करता है कि जब जनता बदलाव का मन बना लेती है, तो स्थापित तंत्र और दशकों पुराने समीकरण बौने साबित हो जाते हैं।
प्रशांत किशोर की संयमित प्रतिक्रिया जीत के बाद प्रशांत किशोर ने अत्यंत संयमित अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीति में हार-जीत तो चलती रहती है, लेकिन उनके लिए बिहार का सर्वांगीण विकास ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता द्वारा जन सुराज पर जताया गया भरोसा, राज्य में एक नए राजनीतिक विकल्प और सकारात्मक सोच की वास्तविक शुरुआत है।
बांकीपुर में 30 साल पुराने राजनीतिक किले का ढहना यह संकेत देता है कि बिहार का मतदाता अब पारंपरिक दलीय और जातीय दायरों से ऊपर उठकर विकास और एक सशक्त विकल्प को तरजीह दे रहा है। इस नतीजे के बाद जहां जन सुराज खेमे में उत्साह और जश्न का माहौल है, वहीं विपक्षी दलों के लिए यह आत्ममंथन का गंभीर विषय बन गया है।