पहले से जारी तनाव के बीच फिर से सांप्रदायिक दंगा भड़का
राष्ट्रीय खबर
काठमांडूः नेपाल के मधेश क्षेत्र में हाल ही में कांवड़ यात्रा के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। विभिन्न जिलों में भड़के सांप्रदायिक तनाव के कारण तीन लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को सुनसरी, सिरहा और धनुषा जैसे प्रभावित इलाकों में कड़ा कर्फ्यू लागू करना पड़ा।
घटना की शुरुआत 26 जुलाई की रात सुनसरी जिले से हुई, जब दो समुदायों के बीच हुई झड़प ने हिंसक रूप ले लिया। इस संघर्ष में देवानगंज के 24 वर्षीय ओमप्रकाश मेहता की गोली लगने से मौत हो गई। इसी हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए 20 वर्षीय जयप्रकाश मेहता ने बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हिंसा का दायरा तब और बढ़ गया जब 30 जुलाई को सिरहा जिले के औराही में हुई झड़प में 17 वर्षीय गणेश यादव की गोली लगने से जान चली गई।
तनाव को थामने के लिए नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने स्वयं घटनास्थल का दौरा किया और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयास किए। सर्वदलीय बैठक के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है। सरकार ने मृतकों के परिवारों के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसमें मृतकों को शहीद का दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू करना। प्रत्येक पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देना। घटना की निष्पक्ष जांच के लिए आयोग का गठन और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का आश्वासन। विवादित मदरसा की कानूनी स्थिति की विस्तृत जांच करना।
भविष्य के लिए सुरक्षा उपाय शांति बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए हैं। अब प्रभावित जिलों में सार्वजनिक स्थानों पर डीजे के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, धार्मिक और सार्वजनिक रैलियों के दौरान किसी भी प्रकार के हथियारों या हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा सकने वाली वस्तुओं के प्रदर्शन को निषेध कर दिया गया है। गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नेपाल की अपनी गौरवशाली परंपरा रही है जहाँ धर्मों के बीच कभी संघर्ष नहीं हुआ, और सरकार इस समस्या को जड़ से मिटाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।