डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दायर कर दी है
कर्नाटक वनाम तमिलनाडु का झगड़ा
दोनों राज्यों को सिंचाई का पानी चाहिए
कम बारिश की वजह से अधिक परेशानी
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः कावेरी नदी का जल बंटवारा एक बार फिर से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच गंभीर राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बन गया है। दशकों पुराने इस मुद्दे ने हाल ही में तब तूल पकड़ा जब तमिलनाडु की पार्टी डीएमके ने कर्नाटक द्वारा जल विनियमन समिति के आदेशों का पालन न करने का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। डीएमके ने न्यायालय से आग्रह किया है कि वह कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु के लिए तत्काल प्रभाव से पानी छोड़ने का निर्देश दे।
यह सारा विवाद 28 जुलाई को जारी कावेरी जल विनियमन समिति के उस आदेश से शुरू हुआ, जिसमें कर्नाटक को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया गया था। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इस आदेश पर अपनी मुहर लगा दी थी। हालाँकि, कर्नाटक सरकार ने इस आदेश को मानने में असमर्थता जताई है। राज्य सरकार का तर्क है कि इस वर्ष अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून की बारिश सामान्य से कम हुई है, जिसके चलते जलाशयों में जलस्तर काफी नीचे है। सरकार को आशंका है कि यदि अधिक पानी छोड़ा गया, तो राज्य के भीतर पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
इस संकट के समाधान और भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री आवास पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक को लेकर शुरुआती दौर में भारतीय जनता पार्टी ने बहिष्कार करने का संकेत दिया था, लेकिन बाद में बदलते घटनाक्रम के बीच भाजपा के शामिल होने की खबर है। साथ ही, कर्नाटक भाजपा प्रमुख विजयेंद्र ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए इस जटिल मुद्दे पर आपसी बातचीत से हल निकालने का आग्रह किया है।
विवाद के बीच एक तकनीकी तथ्य यह भी सामने आया है कि कर्नाटक के मैसूर स्थित काबिनी बांध से तमिलनाडु की ओर 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अधिकारियों के अनुसार, केरल के कैचमेंट एरिया में अत्यधिक वर्षा के कारण जलाशय में पानी का बहाव 40,000 क्यूसेक तक पहुंच गया था। बांध की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इंजीनियरों को जलस्तर नियंत्रित करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप अतिरिक्त पानी छोड़ना अनिवार्य हो गया। फिलहाल स्थिति की निरंतर निगरानी की जा रही है ताकि बांध और जल बंटवारे के मानकों के बीच संतुलन बना रहे।