राहुल गांधी के बाद अब अभिजीत दीपके ने भी वही राय दी
सदन से बचते फिर रहे हैं गृहमंत्री
अब तक कोई बयान भी नहीं दिया
प्रह्लाद जोशी रेपिस्ट के समर्थक हैं
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को दावा किया कि 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर में संवाददाताओं से बात करते हुए, उन्होंने इस पुलिस कार्रवाई के लिए शाह के इस्तीफे की मांग की। दीपके नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीने भर से अधिक चले विरोध प्रदर्शन के बाद लौटे थे, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी यही सवाल उठाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार का कोई तो इस घटना की जिम्मेदारी लेगा। दिल्ली की पुलिस तो अमित शाह के अधीन है।
दीपके ने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने न्यायपालिका पर सवाल उठाए और कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक दलों को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा, देश की बड़ी संस्थाओं का कर्तव्य लोकतंत्र को जीवित रखना था, न कि एक व्यक्ति की तानाशाही को बढ़ावा देना। उन्होंने ऐसा होने दिया। इसे रोकने के लिए केवल विपक्ष को ही नहीं, बल्कि देश की जनता को भी एकजुट होना पड़ेगा।
30 वर्षीय कार्यकर्ता ने प्रहलाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किए जाने की कड़ी आलोचना की और उन्हें अजीब व्यक्ति बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपराधियों और बलात्कारियों का समर्थन करती है। दीपके ने तंज कसते हुए कहा, यदि देश का शिक्षा मंत्री बलात्कारियों का समर्थन करता है, तो इसका मतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के बाद एक और अजीब व्यक्ति को लाया गया है। देश को क्या संदेश दिया जा रहा है? वे कुछ और नहीं कर सकते क्योंकि उनकी पार्टी गुंडों से भरी हुई है।
दीपके का यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा को लेकर छात्रों का आक्रोश और राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र को बचाना अब केवल विपक्ष का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तानाशाही के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखें। उनके तीखे तेवरों ने सरकार की जवाबदेही पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक संघर्ष और तीव्र होने के आसार हैं।