हरियाणा में जन शिकायतों पर सीएम नायब सिंह सैनी का बड़ा एक्शन! प्रशासनिक सचिव रोज करेंगे जनसंवाद पोर्टल की समीक्षा
चंडीगढ़ (हरियाणा): हरियाणा सरकार ने राज्य में जन शिकायतों के समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब सभी सरकारी विभागों के प्रशासनिक सचिव प्रतिदिन ‘जनसंवाद पोर्टल’ पर दर्ज होने वाली जन शिकायतों की खुद समीक्षा करेंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य आम जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान, गुणवत्तापूर्ण एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सुनिश्चित करना और शिकायतकर्ताओं के साथ नियमित संवाद बनाए रखना है। सीएम ने हाल ही में समीक्षा बैठकों के दौरान लंबित मामलों पर कड़ी नाराजगी जताई थी।
📅 मुख्यमंत्री कार्यालय का अत्यंत महत्वपूर्ण पत्र: रोजाना होगी प्रगति की निगरानी, अद्यतन स्थिति करना होगा अपलोड
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी “अत्यावश्यक/अत्यंत महत्वपूर्ण” पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक शिकायत की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
प्रशासनिक सचिव स्वयं फाइलों और शिकायतों की प्रगति रिपोर्ट खंगालेंगे। सरकार ने पाया कि कई बार अधिकारी शिकायतकर्ताओं से संपर्क नहीं करते, जिससे एक ही शिकायत बार-बार मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचती है। ऐसे में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ताओं से सक्रिय संवाद रखें। शिकायतों का अनावश्यक दोहराव पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
📑 एटीआर (ATR) होगी पूरी तरह तथ्यपरक, विभागाध्यक्ष (Head of Dept) के हस्ताक्षर से ही होगी जारी
सरकार ने शिकायतों पर दी जाने वाली एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) को लेकर मानक तय कर दिए हैं।
निर्देश दिए गए हैं कि पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली प्रत्येक एटीआर पूरी तरह स्पष्ट, तथ्यात्मक और ठोस होनी चाहिए। इतना ही नहीं, एटीआर संबंधित विभागाध्यक्ष (HoD) के आधिकारिक हस्ताक्षर से ही जारी की जाएगी, क्योंकि इन सभी रिपोर्ट्स की उच्चस्तरीय समीक्षा स्वयं मुख्यमंत्री स्तर पर भी की जाती है।
❌ जिस अधिकारी या कर्मचारी पर होगी शिकायत, वह खुद नहीं कर सकेगा मामले की जांच
निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने एक और अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला लिया है।
अब जिस भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार, लापरवाही या दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज होगी, उन्हें खुद उस मामले की जांच या निस्तारण की जिम्मेदारी बिल्कुल नहीं दी जाएगी। ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी स्वतंत्र और वरिष्ठ अधिकारी को जांच सौंपी जाएगी, ताकि मामले में किसी भी प्रकार का पक्षपात न हो सके।
⚠️ “नॉट फिजिबल” में देना होगा स्पष्ट कारण, मानव संसाधन (Manpower) की कमी का नहीं चलेगा बहाना
जिन शिकायतों का समाधान तकनीकी या कानूनी कारणों से संभव नहीं होगा, उन्हें “डिनाइड/नॉट फिजिबल” (Denied/Not Feasible) श्रेणी में डालने से पहले ठोस कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा और इसकी लिखित सूचना शिकायतकर्ता को भी दी जाएगी।
उधर, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने भी सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर सरकारी कार्यों या जन शिकायतों के समाधान में देरी करना कतई स्वीकार्य नहीं होगा। सभी विभागों को उपलब्ध मैनपावर का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।