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तुर्की में जलस्तर घटा तो प्राचीन सभ्यता दिखने लगी

दो हजार चार सौ वर्ष पुराना शहर लोगों की नजरम  आया

स्थानीय लोग भी इसे देख हैरान हुए

डिकले बांध का पानी बहुत कम हो गया

अब तक 78 से अधिक संरचनाएं दिखी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः तुर्किए के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित डिकले बांध के जलाशय में हाल के महीनों में पानी के स्तर में भारी गिरावट देखी गई है। इस जलवायु परिवर्तन और सूखे के कारण जलाशय का पानी पीछे हटने से लगभग 2,400 साल पुरानी एक ऐतिहासिक सभ्यता के अवशेष अचानक पानी की सतह पर तैरते हुए दिखाई देने लगे हैं। इस विहंगम दृश्य ने न केवल स्थानीय निवासियों को हैरान कर दिया है, बल्कि दुनिया भर के पुरातत्वविदों और इतिहास प्रेमियों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया है।

वैज्ञानिकों और गोताखोरों की टीम ने जब इस जलमग्न क्षेत्र का गहन सर्वेक्षण किया, तो पानी के नीचे एक पूरी की पूरी संगठित बस्ती के अवशेष प्राप्त हुए। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यहाँ 78 से अधिक रिहायशी मकान, पत्थर से बने प्राचीन मकबरे, कई मस्जिदें और बच्चों के शिक्षण संस्थानों (मदरसों) के ढांचे बेहद स्पष्ट रूप से पहचाने गए हैं।

इस खोज में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि सदियों तक पानी के भीतर डूबे रहने के बावजूद इन संरचनाओं की बनावट और वास्तुकला को बहुत कम नुकसान पहुँचा है। पुरातत्वविदों का मानना है कि पानी के अंदर ऑक्सीजन की कमी और इंसानी गतिविधियों की पूरी तरह अनुपस्थिति के कारण इन इमारतों का क्षरण बेहद धीमी गति से हुआ। यही वजह है कि कई घरों की दीवारें, नक्काशीदार मेहराबें और जल निकासी व्यवस्था आज भी अपनी जगह पर सुरक्षित स्थिति में खड़ी हैं।

ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो यह क्षेत्र प्राचीन मेसोपोटामिया की सीमा से सटा हुआ है। इतिहासकारों का अनुमान है कि यह डूबा हुआ शहर कभी अपने ज़माने में व्यापार, शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र रहा होगा। यहाँ मिले मकबरे और स्थापत्य शैली यह दर्शाती है कि उस काल के लोग उन्नत निर्माण कला और शहरी नियोजन की समझ रखते थे।

वर्तमान में तुर्की का संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय इस स्थल को एक विशेष ऐतिहासिक संरक्षण क्षेत्र घोषित करने की योजना बना रहा है। सरकार पानी के नीचे की इस अनमोल विरासत को सुरक्षित रखने के लिए अंडरवाटर आर्कियोलॉजी (जलमग्न पुरातत्व) विशेषज्ञों की मदद ले रही है। वैज्ञानिक इस शहर का डिजिटल 3डी मैप तैयार कर रहे हैं ताकि भविष्य में यदि पानी का स्तर दोबारा बढ़ता भी है, तो इस ऐतिहासिक संपत्ति का विस्तृत रिकॉर्ड दुनिया के सामने हमेशा सुरक्षित रहे। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि हमारी पृथ्वी की गहराई में आज भी इतिहास के ऐसे अनगिनत पन्ने दफ्न हैं, जिनका बाहर आना बाकी है।

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