अब यूक्रेन को आंतरिक चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है
एजेंसियां
कीवः यूक्रेन में जारी युद्ध का पांचवां वर्ष न केवल सीमा पर रूसी आक्रमण के रूप में, बल्कि देश के भीतर भी एक गंभीर और हिंसक संकट लेकर आया है। रूसी सेना के खिलाफ लड़ने के लिए नए सैनिकों की भारी कमी का सामना कर रहे यूक्रेन में सेना की जबरन भर्ती का मुद्दा अब हिंसक रूप ले चुका है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि आम नागरिक और सेना भर्ती अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं।
पूर्वी डोनबास क्षेत्र की खौफनाक लड़ाइयों में मशीन गनर के रूप में अपनी सेवा दे चुके यूक्रेनी सैनिक वासिल क्रुपिच इस जमीनी हकीकत का जीता-जागता उदाहरण हैं। युद्ध के मैदान में मौत के मुंह से बचकर निकले वासिल जब पिछले साल दिसंबर में भर्ती से बचने वाले युवकों की तलाश कर रही एक गश्ती टीम में शामिल थे, तब उन पर खुद उनके ही देशवासियों ने हमला कर दिया। पहचान पत्र मांगने पर दो युवकों ने उन पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला कर दिया। छह हफ्ते अस्पताल में बिताने वाले वासिल दर्दभरे लहजे में पूछते हैं, हम किसके लिए लड़े थे, अगर अब सड़कों पर सैनिकों को ही पीटा जाने लगे?
यूक्रेन की सैन्य लोकपाल के अनुसार, भर्ती अधिकारियों पर ऐसे हमले अब एक नियमित घटना बन चुके हैं और यह देश के लिए बेहद गंभीर समस्या है। रूसी दुष्प्रचार को बढ़ावा मिलने के डर से लोग इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बचते हैं, लेकिन राष्ट्रीय पुलिस सेवा की हालिया रिपोर्ट बताती है कि अब तक सेना भर्ती अधिकारियों पर 600 से अधिक हमले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि यह आक्रामकता दिन-ब-दिन और अधिक घातक होती जा रही है।
हिंसा का पहला बड़ा मामला अप्रैल में सामने आया था, जब कई अधिकारियों पर चाकू से हमला किया गया, जिसमें एक अधिकारी की मौत हो गई। हाल ही में लविव शहर में स्थिति तब बेकाबू हो गई जब लगभग 200 प्रदर्शनकारियों ने एक संदिग्ध भगोड़े को पकड़ने आए भर्ती अधिकारियों की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया, उसमें तोड़फोड़ की और गाड़ी को पलट दिया। यह घटना दर्शाती है कि युद्ध के लंबे खिंचने के कारण यूक्रेन में अब भर्ती अभियानों को लेकर कितना भारी आक्रोश और डर का माहौल बन चुका है।