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राज्य में अंडा सिंडिकेट एक राजनीतिक मुद्दा

मुख्यमंत्री सरमा ने विधानसभा में इस बात को स्वीकारा

  • सीएम की बात के बाद इस पर बहस तेज

  • गुंडा टैक्स की वजह से कीमतों में बढ़ोत्तरी

  • रायजोर दल के विधायक गोगोई निष्कासित

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी :  असम में इन दिनों अंडा सिंडिकेट और गुंडा टैक्स का मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में गरमाया हुआ है। शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने आरोप लगाया है कि असम-पश्चिम बंगाल सीमा (श्रीरामपुर और बॉक्सीरहाट) से राज्य में प्रवेश करने वाले मालवाहक ट्रकों से भाजपा के संरक्षण में अवैध सिंडिकेट टैक्स वसूला जा रहा है। इसी अवैध वसूली के कारण राज्य में अंडों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं।

गोगोई के अनुसार, राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति ने एक अंडे का मानक मूल्य 5.75 रुपया तय किया है, लेकिन लगभग 3 रुपये प्रति अंडा अवैध सिंडिकेट टैक्स लगने के कारण असम के उपभोक्ताओं को इसके लिए 8.50 से 10 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। उनका दावा है कि यह सिंडिकेट केवल अंडों तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रॉयलर चिकन, मछली, फल, चावल, दाल और बाहर जाने वाली सूखी सुपारी जैसे उत्पादों पर भी भारी अवैध शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने कैबिनेट मंत्री जयंत मल्ला बरुआ और बीटीसी प्रमुख हग्रामा मोहिलारी पर भी इस सिंडिकेट को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

इस मामले पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी विधानसभा में स्वीकार किया कि राज्य में अंडा सिंडिकेट सक्रिय है, जो बाहर से आने वाले और स्थानीय अंडों से अवैध वसूली कर रहा है। इसे खत्म करने के लिए सरकार ने बाहर से आने वाले अंडों पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, असम को अंडा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर निर्वाचन क्षेत्र में उत्पादन इकाई स्थापित करने की योजना बनाई है ताकि श्रीरामपुर गेट से बाहर के अंडों पर निर्भरता खत्म हो सके।

इस बीच, बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री के भाषण में बार-बार बाधा डालने के कारण अखिल गोगोई को 15 जुलाई को असम विधानसभा से शेष दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। गोगोई ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बहुआयामी गरीबी सूचकांक में असम की खराब रैंकिंग पर सवाल उठाए थे। विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास द्वारा निलंबित किए जाने के बाद, उन्होंने विधानसभा परिसर के बाहर काले रंग का दुपट्टा पहनकर इस फैसले का विरोध किया और आरोप लगाया कि उन्हें गरीबी पर सवाल उठाने के कारण सदन से बाहर किया गया।