बीस हजार से अधिक फर्जी बैंक खातों का प्रयोग
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एक सीए से की थी यह ठगी
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पहले रिटर्न देकर ललचाया था
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तेजी से दूसरे खातों मे ट्रांसफर
राष्ट्रीय खबर
भोपालः मध्य प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े ऑनलाइन ट्रेडिंग साइबर फ्रॉड में ग्वालियर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से कथित तौर पर ठगे गए 21.05 करोड़ रुपये देश भर के 20,507 फर्जी (म्यूल) बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। जांचकर्ताओं ने मनी-लॉन्ड्रिंग के इस विशाल नेटवर्क में 12 स्तरों (लेयर्स) पर लेनदेन का पता लगाया है। राज्य साइबर सेल ने अब तक बैंकिंग प्रणाली के जरिए 1.92 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए हैं।
यह जांच ग्वालियर चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुख्य चुनाव अधिकारी और 70 वर्षीय सीए अशोक विजयवर्गीय द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद शुरू हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए यूएसडीटी और बिटकॉइन में निवेश के नाम पर उनसे 21 करोड़ से अधिक रुपये की ठगी की गई।
एफआईआर के अनुसार, यह धोखाधड़ी दिसंबर 2025 में शुरू हुई जब विजयवर्गीय को दिव्या सिंह नामक महिला का व्हाट्सएप कॉल आया, जिसने खुद को निवेश सलाहकार बताया। उसने उन्हें एक वेबसाइट पर पंजीकरण करने को कहा। विश्वास जीतने के लिए शुरुआती छोटे निवेश के बाद आरोपियों ने उन्हें 1.88 लाख रुपये निकालने दिए, जिससे उनका भरोसा बढ़ गया।
इसके बाद, आरोपियों के बहकावे में आकर विजयवर्गीय ने अपने यूनियन बैंक, एचडीएफसी बैंक और दो आईसीआईसीआई बैंक खातों से किश्तों में कुल 21.05 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने अपनी मूल राशि और मुनाफा (कुल 33.25 करोड़ रुपये) निकालना चाहा, तो जालसाजों ने पहले आयकर के रूप में 10.84 करोड़ रुपये और फिर हाई रिस्क कैटेगरी का हवाला देकर अतिरिक्त सुरक्षा राशि (2 लाख यूएसडीटी) की मांग की।
दोस्तों से चर्चा के बाद विजयवर्गीय को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने साइबर सेल से संपर्क किया। साइबर सेल के वित्तीय विश्लेषण से पता चला है कि ठगी की रकम को तेजी से ट्रांसफर करने के लिए पहले स्तर पर 76, दूसरे पर 493, तीसरे पर 12,720 और चौथे स्तर पर 7,218 खातों सहित कुल 20,507 म्यूल खातों का उपयोग किया गया। पुलिस को आशंका है कि इस बड़े घोटाले के पीछे एक संगठित अंतर-राज्यीय साइबर अपराध सिंडिकेट काम कर रहा है।