मेड इन इंडिया चिप्स का सपना भी अब साकार होगा
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करीब बीस साल पहले की योजना थी
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तब केंद्र सरकार ने इस पर साथ नहीं दिया
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अब वैश्विक पहचान का केंद्र बनने की ओर
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत ने एक ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में सीजी सेमी के नए आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट संयंत्र का विधिवत उद्घाटन किया। इस खास अवसर पर उन्होंने देश के औद्योगिक इतिहास से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला वाकया साझा किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में आधुनिक चिप बनाने की बुनियाद वे लगभग बीस वर्ष पहले ही रख चुके थे, लेकिन उस समय दिल्ली की सत्ता में बैठी तत्कालीन केंद्र सरकार की उदासीनता और असहयोगात्मक रुख के कारण देश इस बड़े अवसर से चूक गया।
साणंद में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने मुख्यमंत्री काल के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया, करीब 20 साल पहले या संभवतः उससे भी पहले, मैंने गुजरात में एक विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली थी। इसके लिए गांधीनगर और प्रांतिज के आस-पास लगभग 350 से 400 एकड़ भूमि का आवंटन भी सुनिश्चित कर दिया गया था और वैश्विक कंपनियों के साथ संवाद भी शुरू हो चुका था। उस दौर में केंद्र सरकार की ओर से कागजों पर बड़े-बड़े वादे किए जाते थे, जिसके चलते कंपनियां दिलचस्पी भी दिखाती थीं। लेकिन दुर्भाग्यवश, जब निर्णय लेने और आगे बढ़ने का समय आया, तो तत्कालीन सरकार की नीतियां बेड़ियों की तरह जकड़ी हुई साबित हुईं, जिससे वह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट कभी शुरू ही नहीं हो पाया।
यदि इस ऐतिहासिक संदर्भ पर गौर करें, तो जनवरी 2009 में तत्कालीन केंद्रीय आईटी मंत्री ए. राजा ने भी यह स्वीकार किया था कि साल 2007 की सेमीकंडक्टर नीति के अंतर्गत सरकार को 1.57 लाख करोड़ रुपये के कुल 17 बड़े निवेश प्रस्ताव मिले थे, लेकिन नीतिगत मोर्चे पर स्पष्टता न होने के चलते यह उद्योग उस दौर में रफ्तार पकड़ने में पूरी तरह नाकाम रहा था।
अतीत की नाकामियों और प्रशासनिक शिथिलता को पीछे छोड़ते हुए वर्तमान सरकार ने इस क्षेत्र के लिए एक बेहद मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया है। मोदी सरकार ने दिसंबर 2021 में देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 76,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ इस मिशन की शुरुआत की थी। इसके तहत भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने वाली कंपनियों को सरकार द्वारा 50 फीसद तक की भारी वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया। इन अभूतपूर्व प्रयासों के चलते भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार का भविष्य बेहद उज्ज्वल दिखाई दे रहा है। वर्ष 2023 में इस बाजार का कुल मूल्य जहाँ 38 अरब डॉलर था, वहीं विभिन्न आकलनों के अनुसार वर्ष 2030 तक इसके बढ़कर 100 से 110 अरब डॉलर के विशाल स्तर तक पहुँचने की प्रबल संभावना है।