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National Doctors Day: ‘असली औषधि’ बने डॉ. भेषज कुमार रामटेके, 23 सालों से नक्सल प्रभावित अंतागढ़ में दे रहे सेवा

राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस के अवसर पर हम एक ऐसे चिकित्सक की कहानी साझा कर रहे हैं जिन्होंने अपने नाम के अर्थ ‘भेषज’ (औषधि) को अपने जीवन में पूरी तरह चरितार्थ किया है। कांकेर जिले के नक्सल प्रभावित अंतागढ़ क्षेत्र में पिछले 23 वर्षों से कार्यरत खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भेषज कुमार रामटेके आज मानवता और सेवा की एक जीवंत मिसाल बन चुके हैं।

🚲 शून्य से शुरुआत: साइकिल से नापी दुर्गम राहें

1 अप्रैल 2003 को जब डॉ. रामटेके की पदस्थापना अंतागढ़ में हुई, तो स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। ग्रामीण अस्पताल में आने से डरते थे। ऐसे में डॉ. रामटेके ने अस्पताल में बैठकर मरीजों का इंतजार करने के बजाय गांव-गांव जाकर लोगों का भरोसा जीता। वे साइकिल से उफनते नालों और खतरनाक रास्तों को पार कर सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निकल पड़ते थे।

🛡️ तबादले रुके, जनता का प्यार मिला

डॉ. रामटेके के प्रति क्षेत्र की जनता का अटूट प्रेम इसी बात से जाहिर होता है कि उनके तीन बार तबादले हुए, लेकिन हर बार ग्रामीणों ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें वापस लाने या रुकवाने के लिए आंदोलन किया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने सुरक्षा बलों और घायलों को इलाज देकर अपनी निष्पक्षता और चिकित्सा धर्म का पालन किया है। उनके लिए मरीज सिर्फ एक इंसान है, जिसकी सेवा ही उनका परम धर्म है।

मानव सेवा का मिशन

डॉ. भेषज कुमार रामटेके की यह यात्रा यह संदेश देती है कि चिकित्सा एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का एक बड़ा मिशन है। दुर्गम परिस्थितियों में रहकर उन्होंने अंतागढ़ के हजारों लोगों के दिलों में जो जगह बनाई है, वह किसी भी पुरस्कार से बढ़कर है। डॉक्टर्स दिवस पर हम ऐसे समर्पित डॉक्टर को सलाम करते हैं, जिन्होंने साबित किया है कि सेवा भाव से समाज में बदलाव लाया जा सकता है।