Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पंचकूला सीबीआई अदालत में 645 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले की सुनवाई: आरोपी रिभव रिषी की जमानत पर 17 अग... हरियाणा में 15 अगस्त 2026 स्वतंत्रता दिवस समारोह हेतु ध्वजारोहण की सूची जारी, सीएम नायब सैनी हांसी म... झारखंड जेपीएससी पेपर लीक में बड़ा खुलासा: सरगना अभय तिवारी ने बताई नौकरियों की रेट लिस्ट, JPSC अध्यक... विपक्ष के हंगामे के बीच FCRA संशोधन विधेयक 2026 JPC के पास भेजा गया, जानें 31 सदस्यीय समिति में कौन ... आईपीएल क्रिकेटर अभिषेक पोरेल पर बलात्कार का आरोप: बंगाल पुलिस ने किया गिरफ्तार, 3 दिन की रिमांड पर भ... 'बिग बॉस 20' का धमाकेदार ऑफिशियल ट्रेलर आउट, सलमान खान ने 'एक्स्ट्रा जीवनदान' के नए नियम से चौंकाया RCF कपूरथला ने रचा इतिहास, बांग्लादेश रेलवे के लिए 19 LHB ब्रॉड गेज कोचों की पहली ट्रेन तैयार टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने किया इस्तीफे का ऐलान, शेयर बाजार पर पड़ा भारी असर Vivo X500 सीरीज की लीक डिटेल्स आई सामने: 200MP पेरिस्कोप कैमरा, 2nm चिपसेट और धांसू डिस्प्ले के साथ ... जानिए क्या है गुरुद्वारा लंगर की पावन परंपरा, जहां एक ही पंगत में मिट जाती हैं जाति, धर्म और अमीरी-ग...

MP High Court on Missing Case: “अगर वह जिंदा होती तो खुद लौट आती”; 10 साल पुराने लापता केस में कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक दशक (10 साल) से लापता एक युवती के मामले में बेहद भावुक और यथार्थवादी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विजय शुक्ला की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि, “140 करोड़ की आबादी वाले देश में 10 साल पहले लापता हुए व्यक्ति को खोजना एक अत्यंत कठिन कार्य है।”

👧 2016 में लापता हुई थी सीताराम की बेटी

जबलपुर निवासी सीताराम बर्मन ने साल 2024 में हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। सीताराम का कहना है कि उनकी 17 वर्षीय बेटी जुलाई 2016 में लापता हो गई थी। 10 साल बीत जाने के बाद भी पुलिस उसका कोई सुराग नहीं लगा पाई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस से अब तक की कार्रवाई का स्टेटस मांगा था।

🔍 140 करोड़ की आबादी में तलाशना चुनौतीपूर्ण

सुनवाई के दौरान पुलिस ने 21 स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिससे कोर्ट संतुष्ट नजर आया। युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस सुराग के इतने बड़े देश में किसी व्यक्ति को खोजना पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं है। कोर्ट ने यह भी तर्क दिया कि यदि युवती आज जीवित होती, तो वह अब बालिग हो चुकी होती और अपने माता-पिता या किसी परिचित से संपर्क जरूर कर लेती।

👮 पुलिस को तलाश जारी रखने के निर्देश

युवती का कोई सुराग न मिलने के बावजूद, कोर्ट ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पुलिस को अपनी जांच बंद करने का आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने निर्देशित किया है कि पुलिस युवती की तलाश जारी रखे। साथ ही, यह आदेश दिया कि यदि युवती का पता चलता है, तो उसे तुरंत उसके पिता (याचिकाकर्ता) के सुपुर्द किया जाए।