Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अल-ओबेद में गहराता भुखमरी का संकट Gwalior Crime News: पुरानी रंजिश में युवक पर कुल्हाड़ी और सरिये से जानलेवा हमला; पुरानी छावनी पुलिस ... Train AC Maintenance: ट्रेनों में अब नहीं खराब होगा एसी! भोपाल वर्कशाप में 527 कोचों की होगी मरम्मत Housing Board Gwalior: चंबल कॉलोनी में सड़क पर पेड़ देख भड़के लोग; इंजीनियरों की लापरवाही पर खड़े हु... MP Urban Body Election 2027: प्रत्याशी चयन के लिए कांग्रेस ने कसी कमर; पुराने अनुभवों से सीखकर बनाई ... ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में कार्रवाई के बाद नाराज अमेरिका Madhya Pradesh Politics: सीएम मोहन यादव की संपत्ति पर छिड़ी जंग; बीजेपी विधायक ने रॉबर्ट वाड्रा का न... MP High Court on Missing Case: "अगर वह जिंदा होती तो खुद लौट आती"; 10 साल पुराने लापता केस में कोर्ट... Indore Honor Killing Case: इंदौर के पहले ऑनर किलिंग मामले में कोर्ट का फैसला; तेजकरण भालसे हत्याकांड... Jyotiraditya Scindia Guna Visit: गुना को मिली बड़ी सौगात; 42 करोड़ की कूनो नदी पुनर्जीवन परियोजना का ह...

यूक्रेन के जबर्दस्त हमले के बाद पुतिन पर आंतरिक दबाव

कई खेमों ने युद्ध को तेज करने की मांग कर दी

एजेंसियां

मास्कोः रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध को और अधिक आक्रामक बनाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्रों के भीतर किए जा रहे ड्रोन हमलों और अमेरिका के साथ शांति वार्ताओं के विफल रहने से रूसी हॉक यानी कट्टरपंथियों में भारी रोष है। इन कट्टरपंथी आवाजों ने मांग की है कि रूस अब कूटनीति का रास्ता छोड़ दे और युद्ध में पूरी ताकत झोंक दे।

पिछले कुछ समय में यूक्रेन ने मास्को, सेंट पीटर्सबर्ग और क्रीमिया जैसे दूरस्थ इलाकों में गहरे हमले किए हैं। इन हमलों ने रूसी कट्टरपंथियों को और अधिक उग्र कर दिया है। राष्ट्रवादी टाइकून कोंस्टेंटिन मालोफीव जैसे प्रभावशाली चेहरों का कहना है कि युद्ध का मतलब किसी भी कीमत पर जीत है और रूस को अब वास्तविकता में युद्ध लड़ना चाहिए। इन कट्टरपंथियों का तर्क है कि जब यूक्रेन अपने पास मौजूद हर संसाधन का उपयोग कर रहा है, तो रूस संकोच क्यों कर रहा है? कुछ राष्ट्रवादी यहां तक मांग कर रहे हैं कि रूस को अब उन परमाणु हथियारों का उपयोग करने पर विचार करना चाहिए जिन्हें पूर्वजों ने देश की सुरक्षा के लिए बनाया था।

सोशल मीडिया और टेलीग्राम पर सक्रिय ब्लॉगर भी अब सरकार पर निशाना साध रहे हैं। ऑब्सेस्ड बाय वॉर जैसे ब्लॉग, जिनके लाखों फॉलोअर्स हैं, ने यूक्रेन के प्रमुख शहरों को बमबारी के जरिए रहने लायक न छोड़ने का आह्वान किया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि रूस में यह बढ़ती उग्र बयानबाजी यूक्रेन के ड्रोन हमलों के प्रभाव से उपजी बेचैनी को दर्शाती है। ब्लॉगर यूरी बरानचिक जैसे लोगों का आरोप है कि यूक्रेन के हमले वाशिंगटन की सहमति के बिना असंभव हैं। उनका मानना है कि अब रूस के पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं—या तो वे अमेरिका के दबाव को मात दें या फिर खुद हार का सामना करें।

क्रेमलिन के करीबी सूत्रों का कहना है कि पुतिन फिलहाल इस तरह के बयानों को सहन कर रहे हैं, क्योंकि वे 26 साल से चले आ रहे अपने नियंत्रित राजनीतिक तंत्र में इसे एक निश्चित सीमा तक ही अनुमति देते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह जन-आक्रोश सरकार के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को जटिल बना सकता है। फिलहाल, क्रेमलिन ने कट्टरपंथियों की मांग के बावजूद बातचीत के दरवाजे बंद नहीं किए हैं, भले ही रूसी अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि अमेरिका के साथ पिछले साल अलास्का शिखर सम्मेलन में हुई शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।