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Chhindwara Ration News: सरकारी दुकानों से 3 महीने से गायब है शक्कर; पीले कार्डधारक चाय के लिए मोहताज

छिंदवाड़ा: सरकारी राशन दुकानों से मिलने वाली शक्कर पिछले तीन महीनों से छिंदवाड़ा के गरीब परिवारों के लिए सपना बन गई है। प्रशासनिक टेंडर प्रक्रिया में उलझी यह व्यवस्था आम आदमी, खासकर अति गरीब ‘पीले कार्डधारकों’ के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। आलम यह है कि जो लोग मजदूरी कर अपना गुजारा करते हैं, उनके घरों में चाय बनना तक बंद हो गया है।

📊 35 हजार से अधिक परिवार प्रभावित

छिंदवाड़ा जिले में कुल 3.34 लाख राशन कार्डधारक हैं, जिनमें से 35,588 परिवार पीले कार्डधारक (अति गरीब) हैं। इन परिवारों को सरकार की ओर से प्रतिमाह 1 किलो शक्कर का प्रावधान है, लेकिन अप्रैल महीने से यह सुविधा पूरी तरह ठप है। गरीब मजदूरों का कहना है कि यदि वे बाजार से महंगी शक्कर खरीदने लगेंगे, तो घर का राशन और अन्य बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।

💬 “बाजार से शक्कर खरीदेंगे तो खाएंगे क्या?”

स्थानीय निवासी आरती विश्वकर्मा और छोटी इब्नति जैसे कई लोगों का कहना है कि वे सुबह मजदूरी के लिए निकल जाते हैं, लेकिन घर में महीनों से शक्कर का एक दाना भी नहीं है। वे कहते हैं कि सरकार गरीबों को संबल देने के लिए योजनाएं बनाती है, लेकिन अधिकारी स्तर की लापरवाही के कारण अंततः गरीब को ही पिसना पड़ता है।

🏢 अधिकारियों का तर्क: पूरे प्रदेश में वितरण ठप

इस मामले पर जिला आपूर्ति कार्यालय के असिस्टेंट सप्लायर अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने सफाई दी है कि, “शक्कर का टेंडर न हो पाने के कारण स्थिति केवल छिंदवाड़ा की ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की है।” विभागीय अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही वितरण फिर से शुरू कर दिया जाएगा।