Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
गढ़वा के बलीगढ़ में वज्रपात का कहर: बकरी चराने गए 2 लोगों की दर्दनाक मौत, 1 झुलसा; गांव में मातम गढ़वा: सिरोईकला में नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं छात्र और शिक्षक, DC ने दिए पुल निर्माण की जांच के न... पाकुड़: एक ही रात में कई घरों में चोरी और सेंधमारी का प्रयास, बोलबम के कपड़ों में आए थे चोर; CCTV खं... पलामू में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट पर बवाल, पाटन थाने में एफआईआर दर्ज रांची में JPSC छात्रों पर लाठीचार्ज पर भड़की दिल्ली की सियासत, संसद भवन परिसर में BJP सांसदों का प्र... JPSC-JSSC लाठीचार्ज के खिलाफ पलामू में 'झारखंड छात्र न्याय सत्याग्रह': सूर्या सोनल सिंह के नेतृत्व म... धनबाद सदर अस्पताल में बच्चों का मुफ्त इलाज और सर्जरी: 18 साल तक के बच्चों के लिए विशेष RBSK कैंप शुर... पलामू डीआईजी किशोर कौशल का बड़ा एक्शन, फायरिंग मामलों के अनुसंधान में लापरवाही पर 1 DSP और 4 SI को श... लुधियाना के गांव रतनगढ़ के पास भीषण सड़क हादसा, कैंटर की टक्कर से चाचा-भतीजा गंभीर रूप से घायल लुधियाना में हैवानियत: वीडियो बनाने का विरोध करने पर घर में घुसे 20-25 गुंडे, गर्भवती महिला से मारपी...

जर्मनी में जहरीली इल्लियों का कहर

सरकार ने अपने लोगों से एहतियात बरतने की अपील की

  • पार्कों और जंगली इलाकों पर असर

  • कई ऐसे पार्क बंद भी कर दिये गये

  • इनके रोएं भी गंभीर किस्म का जहर

एजेंसियां

बर्लिनः जर्मनी के विभिन्न हिस्सों में जहरीली इल्लियों (कैटरपिलर्स) का एक आक्रामक प्रकोप फैल गया है, जिसने स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। इन जहरीली इल्लियों के बढ़ते प्रभाव के कारण बर्लिन सहित देश के कई शहरों में पार्कों और अन्य सार्वजनिक खुले स्थानों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

इन ओक प्रोसेशनरी मॉथ इल्लियों के शरीर पर सूक्ष्म, कांटेदार बाल होते हैं जिनमें एक शक्तिशाली विष होता है। यदि ये बाल मनुष्यों के संपर्क में आते हैं, तो ये गंभीर चकत्ते, नेत्रश्लेष्मलाशोथ और सांस लेने में कठिनाई जैसी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इन इल्लियों के जहरीले बाल बहुत आसानी से टूट जाते हैं और हवा के जरिए लंबी दूरी तक फैल सकते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। ये जीव ओक के पेड़ों पर सफेद, रेशमी घोंसले भी बनाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में ये विषाक्त बाल मौजूद होते हैं।

देखें इससे संबंधित वीडियो

बर्लिन में इस प्रकोप की स्थिति विशेष रूप से गंभीर है, जहाँ चार्लोटेनबर्ग-विल्मरडॉर्फ, स्पैंडौ और फ्रेडरिकशाइन-क्रोज़बर्ग जिले मुख्य रूप से प्रभावित हैं। शहर के कई लोकप्रिय ग्रीन स्पेस अब किसी अपराध स्थल जैसे दिखाई दे रहे हैं, जहाँ लाल और सफेद टेप लगाकर लोगों को दूर रहने की चेतावनी दी गई है। स्पैंडौ जिले के अधिकारियों ने जनता से 39 एकड़ में फैले विल्हेम-वॉन-सीमेंस-पार्क और उसके आसपास के स्कूलों, डेकेयर सेंटरों व सड़कों से दूर रहने की अपील की है।

इस खतरे से निपटने के लिए, विशेष सुरक्षा सूट और वेंटिलेशन मास्क पहने कर्मचारी क्रेन के जरिए करीब 20 मीटर (65 फीट) ऊंचाई पर लगे इन घोंसलों को विशेष वैक्यूम मशीनों से हटा रहे हैं। ये मशीनें एस्बेस्टस प्रबंधन के लिए डिज़ाइन की गई हैं, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक इल्ली के शरीर पर मौजूद लगभग 7 लाख जहरीले सूक्ष्म बाल हवा में न फैलें।

अधिकारियों का कहना है कि अकेले उस पार्क में 2,000 पेड़ संक्रमित हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि समस्या को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। वर्तमान में उनका लक्ष्य केवल नुकसान को सीमित करना है, जिसके तहत पैदल रास्तों के सबसे नजदीक वाले पेड़ों को प्राथमिकता दी जा रही है। एक टीम एक दिन में लगभग 20 पेड़ों को साफ करने का लक्ष्य रखती है, लेकिन संक्रमण का स्तर इतना अधिक है कि कभी-कभी एक ही पेड़ से 800 घोंसले हटाने में पूरा दिन लग जाता है। बर्लिन के प्रशासन ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे पार्क से लौटने के बाद अपने कपड़े अच्छी तरह साफ करें और संभव हो तो घर की खिड़कियां व दरवाजे बंद रखें। हैम्बर्ग और नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया राज्यों से भी ऐसे ही प्रकोप की सूचनाएं मिली हैं।