Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jharkhand Health News: अवैध नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का ... Garhwa Monsoon Update: गढ़वा में अब तक 'जीरो' बारिश; खेती के लक्ष्य को लेकर कृषि विभाग चिंता में Jharkhand Politics: राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक पारा; भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आमने-सामने भाजप... Jharkhand News: मुहर्रम जुलूस को लेकर प्रशासन सख्त; डीजे पर प्रतिबंध, ड्रोन से निगरानी और CRPF की तै... Jharkhand Jobs News: स्वास्थ्य विभाग में बड़ी नियुक्तियां; 56 फूड सेफ्टी ऑफिसर और 151 विशेषज्ञ डॉक्टर... Sports Promotion Ranchi: रांची रेल मंडल शुरू करेगा चेस, फुटबॉल और वॉलीबॉल अकादमी; नि:शुल्क प्रशिक्षण... Jamtara School Raid: स्कूल के बरामदे में बैठकर ग्राहकों को लूट रहे थे साइबर अपराधी, पुलिस ने रंगे हा... Bhilai News: स्मार्ट मीटर के खिलाफ भड़के लोग; बिजली कार्यालय में मीटर फेंककर किया जोरदार प्रदर्शन GPM Crime: गांजा तस्करी के पैसों के लेनदेन में हुआ था अपहरण; स्कॉर्पियो, पिस्टल और कारतूस के साथ आरो... Dhamtari News: युवा साहित्यकारों की नई उड़ान; कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने काव्य संग्रह 'युवोदय' का किया ...

Simhastha 2028 Ujjain: पंडे-पुजारियों को ट्रेनिंग देने पर बढ़ा विवाद; अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने किया कड़ा विरोध

उज्जैन: सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियों के बीच उज्जैन में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के ग्वालियर स्थित भारतीय पर्यटन व यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM) ने उज्जैन के पंडे-पुजारियों और टैक्सी-ऑटो चालकों के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम प्रस्तावित किया है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के साथ बेहतर व्यवहार और सेवा को सुनिश्चित करना है। हालांकि, अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने इस कदम को पुजारियों की परंपरा का अपमान बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।

📋 ट्रेनिंग प्रोग्राम के पीछे IITTM का तर्क

IITTM के समन्वयक चंद्र शेखर बरुआ का कहना है कि यह ट्रेनिंग श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए है। इस प्रोग्राम में विनम्र व्यवहार, धैर्य प्रबंधन, महिलाओं-बुजुर्गों की सहायता, भीड़ प्रबंधन और उचित किराया/दक्षिणा जैसे विषयों को शामिल किया गया है। बरुआ का स्पष्ट कहना है कि प्रशिक्षण का उद्देश्य किसी का अनादर करना नहीं, बल्कि सिंहस्थ 2028 को विश्वस्तरीय बनाना है।

🔥 पुजारियों का कड़ा रुख: ‘हमें नहीं, प्रशासन को सुधार की जरूरत’

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश शर्मा ने इस प्रस्ताव को सिरे से नकारते हुए कहा कि पंडे-पुजारियों की सेवा परंपरा सदियों पुरानी है। उन्होंने कहा:

  • पुजारियों पर ‘रूखे व्यवहार’ के आरोप निराधार हैं।

  • ट्रेनिंग की जरूरत पुजारियों को नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन के उन जिम्मेदारों को है जो भीड़ प्रबंधन के नाम पर श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव करते हैं और उन्हें लंबी दूरी तक पैदल चलने पर मजबूर करते हैं। महासंघ ने मांग की है कि IITTM को इस प्रस्ताव के लिए पंडे-पुजारियों से माफी मांगनी चाहिए।

⚖️ विवाद का मुख्य कारण

जहां प्रशासन का लक्ष्य सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर ‘सर्विस सेक्टर’ तैयार करना है, वहीं पुजारियों का मानना है कि उनकी धार्मिक भूमिका को व्यावसायिक प्रशिक्षण की दृष्टि से देखना उनकी परंपराओं की अनदेखी है। प्रशासन का कहना है कि यह केवल जागरूकता के लिए है, जबकि पुजारी समाज इसे अपने स्वाभिमान से जोड़कर देख रहा है।