कई अन्य देशों की राह पर चलने की सोच रहा यूके भी
एजेंसियां
लंदनः यूनाइटेड किंगडम (यूके) सरकार ने एक महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय बना हुआ निर्णय लेते हुए 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह कदम कई अन्य देशों द्वारा अपनाए गए सुरक्षा उपायों के अनुरूप है, लेकिन इसने ब्रिटिश सरकार की अपनी ही नीतियों और प्राथमिकताओं के बीच एक वैचारिक अंतर्विरोध को जन्म दे दिया है।
इस प्रस्तावित प्रतिबंध के दायरे में इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। हालांकि, व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग ऐप्स को इस दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि संचार की बुनियादी आवश्यकता प्रभावित न हो। सार्वजनिक समर्थन के दृष्टिकोण से यह कदम काफी लोकप्रिय प्रतीत होता है, विभिन्न सर्वेक्षणों में 74 फीसद लोगों ने इस प्रतिबंध का समर्थन किया है। इसके पीछे का मुख्य तर्क बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा है, हालांकि वैज्ञानिक और अकादमिक जगत में इस बात पर गहरा मतभेद है कि सोशल मीडिया का मानसिक स्वास्थ्य पर कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और क्या इस प्रकार के प्रतिबंध वास्तव में प्रभावी साबित हो सकते हैं।
इस निर्णय का सबसे दिलचस्प पहलू सरकार की अन्य विधायी प्राथमिकताओं के साथ इसका टकराव है। वर्तमान में ब्रिटिश सरकार एक ऐसा कानून पारित करने की प्रक्रिया में है, जो 16 वर्ष के युवाओं को मतदान करने का अधिकार देगा। यह स्थिति एक जटिल संवैधानिक और नैतिक प्रश्न खड़ा करती है: यदि 16 वर्ष के किशोरों को एक राष्ट्र के भविष्य को चुनने का अधिकार (मतदान) दिया जा रहा है, तो क्या उन्हें सूचना के उन स्रोतों से वंचित करना उचित है, जो आज के समय में समाज और राजनीति को समझने के लिए अनिवार्य हैं?
फायनेंशियल टाइम्स के एक स्तंभकार ने इस विरोधाभास पर तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा है कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या 16 वर्ष के युवा संप्रभु वयस्क हैं या नहीं। यदि उन्हें मतदान का अधिकार दिया जाता है, तो उन्हें अन्य मतदाताओं के समान ही सूचना वातावरण तक पहुंच प्राप्त होनी चाहिए। अन्यथा, तार्किक रूप से सरकार को 16 साल की उम्र में मतदान के अपने रुख पर पुनर्विचार करना होगा। यह प्रतिबंध न केवल तकनीकी और सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों और वयस्कता की आयु के बीच संतुलन बनाने की एक कठिन चुनौती भी है।