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बिहार में दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाये जाने पर विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनवाई पर सहमति जतायी

  • बिहार सरकार से जवाब मांगा गया

  • किसी सदन का सदस्य नहीं है वह

  • सम्राट चौधरी कैबिनेट में मंत्री हैं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को एक याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका बिहार मंत्रिमंडल में दीपक प्रकाश की मंत्री के रूप में पुनर्नियुक्ति को चुनौती देती है।

दीपक प्रकाश को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार कैबिनेट में पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया है। याचिका का मुख्य बिंदु यह है कि प्रकाश न तो बिहार विधानसभा के सदस्य हैं और न ही राज्य विधान परिषद के।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह के वकील से मामले की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछा। वकील ने पुष्टि की कि प्रकाश वर्तमान में भी मंत्री पद पर बने हुए हैं। इसके बाद अदालत ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और भारत निर्वाचन आयोग से इस मामले में जवाब तलब करते हुए सुनवाई की सहमति दी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में, अदालत के सामान्य कामकाज बहाल होने के बाद होगी।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार, कोई मंत्री जो लगातार छह महीने की अवधि तक राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि दीपक प्रकाश को 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट में शामिल किया गया था, जबकि वे उस समय भी किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। याचिका के अनुसार, 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार में उन्हें पुन: मंत्री नियुक्त किया गया, जबकि वे अभी भी न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं। यह मामला संवैधानिक प्रावधानों के पालन और मंत्रियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर एक बार फिर बहस छेड़ सकता है।