Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
दक्षिणी लेबनान को खाली करने से नेतन्याहू का इंकार राष्ट्रपति लूला तक अब बैंकिंग घोटाले की आंच पहुंची कांगो में इबोला संक्रमितों की संख्या 896 हुई युद्ध क्षेत्र में बच्चों के खिलाफ अत्याचार President Droupadi Murmu Birthday: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्मदिन; पीएम मोदी, राजनाथ सिंह समेत... NEET Re-Exam Preparation: परीक्षा से पहले आज देशभर में NTA की 'मॉक ड्रिल'; जानें सुरक्षा और संचालन क... Karnataka Welfare Schemes: अब वोटर लिस्ट में नाम होने पर ही मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ; सीएम डीके ... Economic Crisis Allegations: महंगाई और बेरोजगारी पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर निशाना; RBI गवर्नर ने ... Maharashtra Politics: शिवसेना स्थापना दिवस पर शिंदे का शक्ति प्रदर्शन; राहुल गांधी और उद्धव गुट पर स... NEET UG Student Death: गाजियाबाद के प्रताप विहार में NEET की तैयारी कर रहे छात्र की मौत; जांच में जु...

टीएमसी के बागी नेताओँ की दोबारा फजीहत हो गयी

विरोध के बाद पार्टी में शामिल होना स्वीकारा

  • शांतनु डे ने पहले विरोध किया था

  • मीटिंग के बाद बयान से पलट गये

  • अध्यक्ष पर लगा पैसा लेने का आरोप

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा संकट एक नए और नाटकीय मोड़ पर पहुँच गया है। नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया के एक नेता, जिन्होंने शुरुआत में तृणमूल के 20 बागी सांसदों के अपनी पार्टी में विलय का कड़ा विरोध किया था, ने अब यू-टर्न ले लिया है और बागी नेताओं के स्वागत के लिए तैयार हो गए हैं।

यह पार्टी अचानक तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आई जब तृणमूल के बागी सांसदों ने इस छोटे से राजनीतिक संगठन में विलय की घोषणा की। हालांकि, कल तक एनसीपीआई  के महासचिव शांतनु डे ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि यह निर्णय उनसे और अन्य वरिष्ठ नेताओं से परामर्श किए बिना लिया गया है। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष उत्तम कुंडू पर तृणमूल के बागी नेताओं को शामिल करने के बदले पैसे लेने का गंभीर आरोप लगाया था।

आज हुई पार्टी की बैठक के बाद शांतनु डे ने अपना रुख पूरी तरह बदल लिया। उन्होंने कहा, हम एक छोटी पार्टी हैं और पश्चिम बंगाल के लिए काम करना चाहते हैं। बैठक में निर्णय लिया गया है कि हम तृणमूल के बागी सांसदों का अपनी पार्टी में स्वागत करेंगे। गौरतलब है कि इस बैठक में पार्टी के अध्यक्ष उत्तम कुंडू और कोषाध्यक्ष शेवली कुंडू अनुपस्थित रहे।

शेवली कुंडू, जो पेशे से एक वकील हैं, ने शांतनु डे के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे 2023 से पार्टी के महासचिव या सदस्य नहीं हैं। उन्होंने विलय के मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। शेवली ने यह भी स्पष्ट किया कि वे पार्टी की संस्थापक अध्यक्ष थीं, लेकिन अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा थी।

बता दें कि साल 2023 में चुनाव आयोग के साथ एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत हुई एनसीपीआई, त्रिपुरा में अपने चुनावी डेब्यू के बाद से ही चर्चा में है। हालांकि, पार्टी का अब तक का चुनावी प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, इसे अब तक कुल 1.13 लाख रुपये का चंदा प्राप्त हुआ है।

यह विलय ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो अप्रैल-मई के चुनावों में हार के बाद से लगातार पार्टी में हो रही टूट को रोकने के लिए संघर्ष कर रही है। अब तक तृणमूल के कम से कम 20 बागी सांसदों ने खुलकर अपना असंतोष जताया है।