नीति आयोग की बैठक में बना अनोखा रिकॉर्ड
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली नीति आयोग की वार्षिक बैठकें हाल के वर्षों में अक्सर विपक्षी मुख्यमंत्रियों के बहिष्कार और अनुपस्थिति के कारण चर्चा में रहती थीं। हालांकि, इस वर्ष नीति आयोग की बैठक ने इस पुरानी परिपाटी को तोड़ते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। गुरुवार को आयोजित देश के इस शीर्ष सार्वजनिक नीति मंच में भारत के सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया, जिससे यह परिषद के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपस्थिति वाली बैठक बन गई है।
राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित नीति आयोग की इस 11वीं शासी परिषद की बैठक में विपक्ष शासित सभी सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें तमिलनाडु के जोसेफ विजय, कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार, केरल के वी.डी. सतीशन, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, झारखंड के हेमंत सोरेन, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला शामिल थे। विपक्ष के इन दिग्गज नेताओं के साथ-साथ भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों—जिनमें देवेंद्र फडणवीस, योगी आदित्यनाथ और शुभेंदु अधिकारी प्रमुख थे—ने भी बैठक में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्रियों के अलावा केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और कई केंद्रीय मंत्री भी इस व्यापक मंथन का हिस्सा बने।
इस बैठक की संवेदनशीलता और कूटनीतिक महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बैठक के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। इनमें से चार राज्य विपक्षी दलों द्वारा शासित हैं। यह अभूतपूर्व दृश्य पिछले वर्षों की तुलना में पूरी तरह विपरीत था। उदाहरण के लिए, पिछले वर्ष (2025) आयोजित 10वीं शासी परिषद की बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के पिनाराई विजयन, कर्नाटक के सिद्धारमैया और राजग के तत्कालीन सहयोगी व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे बड़े नेताओं ने दूरी बना ली थी। इसी प्रकार, वर्ष 2024 में विपक्ष के बहिष्कार और पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण 10 मुख्यमंत्री बैठक से गायब रहे थे, जबकि 2023 में 9 मुख्यमंत्रियों ने इस बैठक से दूरी बनाई थी।