Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Uttarakhand Disaster Management Model: ब्रिक्स देशों ने मानी उत्तराखंड की धाक; आपदा प्रबंधन मॉडल की ... Akshay Kumar Charity: क्या अक्षय कुमार सिर्फ पैसा कमाने के लिए करते हैं फिल्में? एक्टर ने चैरिटी के ... Manav Suthar Test Debut: टेस्ट डेब्यू पर 6 विकेट लेकर रचा इतिहास; मानव सुथार ने 18 साल का सूखा किया ... Israel-Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ा युद्ध का खतरा; क्या नेतन्याहू की जंग की जिद बन रही है ... Gold-Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट; जानें क्या है आज का नया भाव Environmental Impact of AI: एआई की बढ़ती मांग से बढ़ रहा जल संकट; 2027 तक हालात हो सकते हैं गंभीर Kalashtami Vrat 2026: कालाष्टमी पर काल भैरव देव की विशेष पूजा; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व Banarasi Kachori Sabji Recipe: घर पर बनाएं बनारस का प्रसिद्ध नाश्ता; कचौड़ी-सब्जी बनाने की आसान विधि MP Rajya Sabha Election 2026: तीसरी सीट पर भाजपा का दांव; महेश केवट के नामांकन के बाद बढ़ी सियासी हलच... Earthquake in Northeast: भूटान के पास 5.7 तीव्रता का जोरदार भूकंप; सिक्किम और बंगाल तक महसूस किए गए ...

Delhi Fire Service Crisis: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दिल्ली फायर विभाग की पोल खुली; 15 साल से नहीं हुई भर्ती

नई दिल्ली: मालवीय नगर अग्निकांड में 22 लोगों की मौत के बाद दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में सामने आया है कि दिल्ली का अग्निशमन विभाग पिछले काफी समय से भारी मैनपावर की कमी और पुराने पड़ चुके कम्युनिकेशन सिस्टम जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। एक तरफ दिल्ली तेजी से आधुनिक हो रही है, तो दूसरी तरफ दमकल विभाग आज भी पुराने बुनियादी ढांचे के साथ काम करने को मजबूर है।

📉 15 साल से नहीं हुई सीधी भर्ती: खाली पड़े हैं हजारों पद

सरकारी आंकड़े चौंकाने वाले हैं। दिल्ली फायर सर्विस में फायर फाइटर के कुल 3,312 मंजूर पदों में से 853 पद खाली पड़े हैं। इससे भी अधिक गंभीर स्थिति स्टेशन ऑफिसर की है, जहाँ 90 मंजूर पदों में से केवल 18 पर ही अधिकारी तैनात हैं। इन पदों के लिए आखिरी सीधी भर्ती वर्ष 2011 में हुई थी, जिसका अर्थ है कि पिछले 15 वर्षों से विभाग में नई नियुक्तियों का सूखा पड़ा है। 2011 में ही गृह मंत्रालय ने फायर इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी कमियों की पहचान की थी, लेकिन सुधार की गति धीमी रही।

📡 1969 के कम्युनिकेशन सिस्टम पर निर्भरता

रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली फायर सर्विस अभी भी 1969 में स्थापित वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम पर निर्भर है। भले ही रेडियो सेट को समय के साथ डिजिटल मोबाइल रेडियो में बदल दिया गया हो, लेकिन बुनियादी वायरलेस फ्रीक्वेंसी और इंफ्रास्ट्रक्चर में दशकों से कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ है। हैरानी की बात यह है कि फायर स्टेशनों की संख्या 17 से बढ़कर 71 हो गई है, लेकिन कम्युनिकेशन नेटवर्क उस रफ्तार से अपग्रेड नहीं हो पाया।

🗣️ राजनीतिक संग्राम: बीजेपी का AAP पर हमला

दिल्ली की इस दयनीय स्थिति के लिए बीजेपी ने पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। बीजेपी नेता आशीष सूद ने कहा, “पिछली सरकार ने फायर सर्विस को मजबूत करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए, जिसका खामियाजा आज दिल्ली की जनता भुगत रही है।” वहीं, मौजूदा सरकार ने दावा किया है कि वे खाली पदों को भरने और DFS के पूर्ण आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पर तेजी से काम कर रहे हैं।