मौसम विज्ञान के शोधकर्ताओं ने एक पूर्व चेतावनी जारी की
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जून से अगस्त तक खतरा है
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अगले साल तक असर रहेगा
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कहीं बाढ़ तो कहीं भीषण सूखा
जेनेवाः वर्ष 2026 में अल नीनो के आगमन की प्रबल संभावना बनी हुई है। मौसम विज्ञान से जुड़ी वैश्विक संस्थाओं के नवीनतम पूर्वानुमानों के अनुसार, मध्य-पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि देखी जा रही है, जो अल नीनो के विकसित होने का संकेत है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और अमेरिकी मौसम एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, जून-अगस्त 2026 के दौरान अल नीनो के विकसित होने की संभावना लगभग 80 फीसद से 82 फीसद है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह स्थिति 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत (सर्दियों) तक बनी रह सकती है।
यद्यपि कुछ पूर्वानुमान मॉडल इसे सुपर अल नीनो की संभावना के रूप में देख रहे हैं, जिसके तहत प्रशांत महासागर के तापमान में 2 डिग्री से से 3 डिग्री से तक की वृद्धि हो सकती है, लेकिन आधिकारिक मौसम एजेंसियां सुपर अल नीनो जैसे शब्दों का उपयोग करने से बचती हैं। वर्तमान में, वैज्ञानिक इसके चरम प्रभाव और तीव्रता को लेकर सतर्क हैं और इसे मध्यम से लेकर अत्यधिक शक्तिशाली होने की संभावना मान रहे हैं।
इसके पहले भी अल नीनो के कारण विश्व भर में मौसम के मिजाज में बड़े बदलाव देखे गये हैं। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों (जैसे उरुग्वे, दक्षिणी ब्राजील और उत्तरी अर्जेंटीना) में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की आशंका है, जबकि कोलंबिया और वेनेजुएला जैसे क्षेत्रों में सूखा पड़ सकता है। मध्य अमेरिकी ड्राई कॉरिडोर जैसे क्षेत्रों में अनियमित बारिश के कारण कृषि चक्र प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर संकट का खतरा है। अत्यधिक गर्मी, सूखे की लंबी अवधि, जंगलों में आग और मूंगा विरंजन जैसी घटनाओं में वृद्धि होने की चिंता जताई जा रही है।
भारत सहित एशियाई मानसून क्षेत्रों के लिए भी अल नीनो का प्रभाव चिंता का विषय है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से यह मानसून की बारिश को कम कर सकता है। अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस और अन्य मानवीय एजेंसियां इस स्थिति के प्रति गंभीर हैं। वे इसे ला नीना (ठंडी स्थिति) से अल नीनो (गर्म स्थिति) की ओर बहुत तेज संक्रमण मान रही हैं। चूंकि प्रत्येक अल नीनो घटना अपने आप में अद्वितीय होती है, इसलिए सरकारें और आपदा प्रबंधन एजेंसियां खाद्य सुरक्षा, जल आपूर्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए सक्रिय तैयारी कर रही हैं। आने वाले महीनों में स्थिति और अधिक स्पष्ट होगी, जिसके आधार पर आपदा तैयारियों को और अधिक सटीक रूप दिया जाएगा।