दिल्ली में दाल नहीं गली तो अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका
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एनआईए और ईडी जांच की मांग
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सभी एकाउंट भी ब्लॉक कर दें
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भाजपा कार्यकर्ता की है यह याचिका
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष एक आपराधिक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें देश की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े गंभीर आरोप लगाते हुए एक बहु-एजेंसी जांच की मांग की गई है। इस याचिका में कॉक्रोच जनता पार्टी नामक संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय से व्यापक जांच कराने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता ने इस संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की भी गुहार लगाई है।
यह आपराधिक जनहित याचिका कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई है। याचिका में प्रतिवादी अभिजीत दिपके और उनके संगठन पर बेहद संगीन आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का मुख्य आरोप है कि यह संगठन और इसके संस्थापक देश के युवाओं को भड़काने तथा उन्हें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाने की गतिविधियों में संलिप्त हैं।
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर कॉक्रोच जनता पार्टी के नाम से चलाए जा रहे अभियानों का उद्देश्य देश की संप्रभुता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना है। युवाओं के बीच असंतोष पैदा करने और उन्हें राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों की ओर धकेलने के पीछे एक गहरी साजिश का अंदेशा जताया गया है। याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और विदेशी फंडिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, जिसकी वजह से इस मामले की जांच न केवल आतंकवाद-रोधी विंग एनआईए से, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने वाली संस्था ईडी से भी कराई जानी बेहद जरूरी है।
इस आपराधिक जनहित याचिका के माध्यम से अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे संबंधित अधिकारियों को निर्देश दें ताकि कॉक्रोच जनता पार्टी से जुड़े सभी इंटरनेट डोमेन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और प्रचार सामग्रियों को तुरंत ब्लॉक किया जा सके, ताकि युवाओं को और अधिक गुमराह या प्रभावित होने से समय रहते रोका जा सके। आने वाले दिनों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा इस जनहित याचिका पर विचार किए जाने और इस पर प्रारंभिक सुनवाई होने की संभावना है, जिस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हल्के की नजरें टिकी हुई हैं।