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असम में समान नागरिक संहिता विधेयक पास

विपक्ष ने असम यूसीसी विधेयक को भाजपा का राजनीतिक एजेंडा बताया

  • उत्तराखंड के बाद ऐसा करने वाला दूसरा राज्य

  • मिथुनों के व्यवसायिक वध पर रोक लगायी

  • टेंग्नौपाल में 28 से अनिश्चतकालीन बंदी होगी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम विधानसभा ने 27 मई 2026 को समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिया है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम देश का तीसरा ऐसा राज्य बन गया है जिसने इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा द्वारा पेश किए गए इस कानून का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना विवाह, तलाक, विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करना है। इस मसौदा कानून में बहुविवाह पर प्रतिबंध, लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण और नियमों के उल्लंघन पर सात साल तक की कैद का प्रावधान है। हालांकि, यह कानून असम की अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखता है।

सदन में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने इसका कड़ा विरोध किया। कांग्रेस विधायक वाजेद अली चौधरी और जाकिर हुसैन सिकदर ने इसे भाजपा का राजनीतिक एजेंडा बताते हुए कहा कि बाल विवाह और तलाक जैसे मुद्दों पर कानून पहले से मौजूद हैं और यह नया कानून प्रक्रिया को और जटिल बनाएगा। उन्होंने बिना व्यापक सार्वजनिक और धार्मिक संगठनों से परामर्श के इसे पारित करने पर आपत्ति जताई। विपक्ष ने आदिवासियों को इस कानून से बाहर रखने पर भी सवाल उठाए और इसे असम की विविधता के खिलाफ बताया। एआईयूडीएफ विधायक मजीबुर रहमान ने चिंता जताई कि यह अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधेयक का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का इतिहास पुराना है और सबसे पहले 1925 में कांग्रेस ने ही इसकी वकालत की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी पार्टी की विचारधारा पर नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 पर आधारित है।

इसी बीच पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों से भी महत्वपूर्ण खबरें आईं। ईटानगर कैपिटल रीजन प्रशासन ने कृषि उपज विपणन अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मिथुन के व्यावसायिक वध पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है; नियम तोड़ने वालों पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, मणिपुर के टेंग्नौपाल जिले में कई कुकी सिविल सोसाइटी संगठनों ने 28 मई 2026 से अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकाबंदी की घोषणा की है। वे कुकी-जो समुदाय के तीन मारे गए धार्मिक नेताओं के लिए न्याय और मणिपुर हिंसा के दौरान दोनों पक्षों द्वारा बंधक बनाए गए लोगों की सुरक्षित रिहाई की मांग कर रहे हैं।