Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
राज्यसभा चुनाव में तेज हुआ जोड़ घटाव का खेल Solar Power Plant in Sitapur: रक्षा भूमि पर देश का पहला बड़ा सोलर प्रोजेक्ट; राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी Yamuna O-Zone Delhi: यमुना किनारे रहने वालों को बड़ी राहत; बीजेपी सांसदों ने कहा- 'पुरानी बस्तियों पर... PM Modi Historic Record: पीएम मोदी बने देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री; नेहरू का रिकॉ... INDIA Alliance Meeting: गठबंधन का पीएम चेहरा तय करने की मांग; संजय राउत बोले- 'अगर मोदी बन सकते हैं ... Bihar Industrial Policy: बिहार में उद्योग लगाना हुआ आसान; 30 दिनों में नहीं मिली मंजूरी तो आवेदन होग... MP Rajya Sabha Election: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द; मध्य प्रदेश की तीनों सीटों पर BJP की जीत प... Baghpat Crime News: बागपत में दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग; टेंट व्यवसायी के पिता-पुत्र की हत्या, इला... Jaipur Fire Accident: जयपुर की अवैध पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, कई गंभीर Delhi Weather Alert: दिल्ली-NCR में फिर बदलेगा मौसम; 11 जून को 70 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, बा...

चिकित्सा क्षेत्र में आ सकती है बड़ी क्रांति, देखें वीडियो

वैज्ञानिकों ने प्रकाश के उपयोग से बनाए सूक्ष्म अणु

  • अधिक तनाववाले अणुओं का निर्माण

  • फोटोकैटलिस्ट पद्धति पर किया शोध

  •  1,4-डाइन्स नामक हाइड्रोकार्बन से प्रारंभ

राष्ट्रीय खबर

रांचीः नयी दवाओं का विकास अक्सर सही आणविक निर्माण खंडों (मॉलिक्यूलर बिल्डिंग ब्लॉक्स) की खोज पर निर्भर करता है। पेनिसिलिन सहित कुछ महत्वपूर्ण दवाएं, छोटे छल्ले के आकार (रिंग-शेप्ड) वाले अणुओं पर निर्भर करती हैं जो अपने भीतर भारी मात्रा में आंतरिक तनाव (इंटरनल टेंशन) को संचित रखते हैं। ये तनावग्रस्त संरचनाएं रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज कर सकती हैं, जिससे वैज्ञानिकों को अधिक कुशलता से जटिल यौगिकों (कॉम्प्लेक्स कंपाउंड्स) का निर्माण करने में मदद मिलती है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

जर्मनी में यूनिवर्सिटी ऑफ मुंस्टर के इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में प्रोफेसर फ्रैंक ग्लोरियस के नेतृत्व में एक शोध दल ने अब इन चुनौतीपूर्ण आणविक संरचनाओं में से एक को बनाने का एक नया तरीका पेश किया है। यह पद्धति सरल और व्यापक रूप से उपलब्ध शुरुआती सामग्रियों को सघन, अत्यधिक तनावग्रस्त अणुओं में बदल देती है जिन्हें हाउसेंस के रूप में जाना जाता है।

इनका यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इनका आकार घर के एक साधारण चित्र जैसा दिखता है। इस रासायनिक प्रतिक्रिया को एक फोटोकैटलिस्ट (प्रकाश उत्प्रेरक) द्वारा संचालित किया जाता है, जो प्रकाश से ऊर्जा को अणुओं में स्थानांतरित करता है, जिससे यह परिवर्तन संभव हो पाता है।

छोटे रिंग वाले अणु कुछ हद तक दबाव में मुड़ी हुई टहनियों की तरह व्यवहार करते हैं। चूंकि इनमें बहुत अधिक संचित तनाव होता है, इसलिए वे बाद की प्रतिक्रियाओं के दौरान ऊर्जा को मुक्त कर सकते हैं। यह विशेषता उन्हें उपयोगी रसायनों और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन के लिए मूल्यवान उपकरण बनाती है।

अपने महत्व के बावजूद, इन अणुओं का निर्माण करना बेहद कठिन माना जाता है। हाउसेंस बनाने के पिछले तरीकों में अक्सर उच्च तापमान और अन्य कठोर परिस्थितियों की आवश्यकता होती थी। उन पुराने तरीकों को शुरुआती सामग्रियों से जुड़े अतिरिक्त परमाणुओं या आणविक साइड समूहों (जिन्हें कार्यात्मक समूह या फंक्शनल ग्रुप कहा जाता है) के साथ तालमेल बिठाने में भी संघर्ष करना पड़ता था। ये कार्यात्मक समूह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे दृढ़ता से प्रभावित करते हैं कि एक अणु कैसा व्यवहार करता है और उसमें क्या गुण हैं।

शोधकर्ताओं ने 1,4-डाइन्स नामक हाइड्रोकार्बन के साथ इसकी शुरुआत की। प्रकाश के संपर्क में आने पर, ये यौगिक आमतौर पर अवांछित पार्श्व प्रतिक्रियाओं (साइड रिएक्शंस) से गुजरते हैं जो वांछित प्रक्रिया में बाधा डालते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए, टीम ने शुरुआती सामग्रियों की आणविक साइड चेन को समायोजित किया, जिससे इन प्रतिस्पर्धी प्रतिक्रियाओं को दबाने में मदद मिली और रसायन विज्ञान अधिक नियंत्रित व पूर्वानुमानित हो गया।

एक बार जब अवांछित रास्ते अवरुद्ध हो गए, तो अणु हाउसेंस बनाने के लिए आवश्यक तनावग्रस्त रिंग संरचना में मुड़ने में सक्षम हो गए। फ्रैंक ग्लोरियस के अनुसार, इस प्रक्रिया को हासिल करना आम तौर पर कठिन होता है क्योंकि यह ऊर्जा के दृष्टिकोण से चढ़ाई जैसा है और इसके लिए अतिरिक्त गति की आवश्यकता होती है। फोटोकैटालिसिस इसके लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। टीम ने प्रतिक्रिया तंत्र (रिएक्शन मैकेनिज्म) और यह परिवर्तन कैसे होता है, इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए कंप्यूटर आधारित विश्लेषणों का भी उपयोग किया।

यह नई तकनीक हाउसेंस का उत्पादन करने का एक अधिक कुशल और सुलभ तरीका प्रदान करती है, जबकि इन उच्च-तनाव संरचनाओं से बनाए जा सकने वाले अणुओं के दायरे का भी विस्तार करती है। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि यह विधि बुनियादी रसायन विज्ञान अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों, दोनों का समर्थन कर सकती है, जिसमें दवा निर्माण (फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग) और उन्नत सामग्रियों का विकास शामिल है।

#MedicalScience #ChemistryInnovation #Photocatalysis #DrugDiscovery #ScientificBreakthrough #चिकित्साविज्ञान #रसायननवाचार #फोटोकैटालिसिस #दवाखोज #वैज्ञानिकउपलब्धि