भारत और आइसलैंड के प्रधानमंत्रियों की चर्चा में शब्दों का जुड़ाव
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान एक बेहद दिलचस्प और आत्मीय कूटनीतिक क्षण देखने को मिला। आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्टुन फ्रॉस्टाडोटिर ने हिंदी के शब्द संबंध पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए भारत और आइसलैंड के बीच इसके भाषाई और भावनात्मक महत्व की सराहना की। यह चर्चा मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संबोधन के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने बताया था कि कई नॉर्डिक भाषाओं में भी इस शब्द का बिल्कुल वही अर्थ है जो हिंदी में होता है।
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसलैंड की प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, हमने मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से देखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने आइसलैंड से भारत में आने वाले निवेश में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है। हमारे पास साथ मिलकर काम करने के लिए बहुत सारे क्षेत्र हैं। इसके साथ ही, मैं विशेष रूप से कहना चाहूंगी कि मुझे संबंध शब्द से गहरा लगाव हो गया है। यह पूरी तरह से एक आइसलैंडिक शब्द भी है, और आइसलैंड के लोग इस भाषाई जुड़ाव को बहुत पसंद करेंगे, क्योंकि आज के समय में दुनिया को इसी की सबसे ज्यादा जरूरत है। आज लोगों को और अधिक संबंध की आवश्यकता है। इस पर पीएम मोदी ने कहा, यह सिर्फ शब्दों की समानता नहीं, विचारों की निकटता है
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इस शब्द का बार-बार उल्लेख करते हुए दोनों क्षेत्रों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक नया आयाम दिया था। पीएम मोदी ने कहा, आज मैंने संबंध शब्द का कई बार प्रयोग किया। कई नॉर्डिक भाषाओं (जैसे आइसलैंडिक) में शब्द का अर्थ कनेक्शन, रिश्ते या एक मजबूत बंधन होता है। हिंदी में भी संबंध का बिल्कुल यही अर्थ है। यह केवल शब्दों की आकस्मिक समानता नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों की गहराई और निकटता को दर्शाता है। पीएम मोदी ने आगे वैश्विक कल्याण के लिए इस साझेदारी को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा, आइए हम हर क्षेत्र में अपने बीच के इन संबंधों को और गहरा करें। हम भारत-नॉर्डिक साझेदारी को साझा समृद्धि, नवाचार (इनोवेशन) और एक सतत भविष्य का एक आदर्श मॉडल बनाएं।
राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में इस तरह के भाषाई और सांस्कृतिक जुड़ाव केवल औपचारिक औपचारिकता नहीं होते, बल्कि ये देशों के बीच कूटनीतिक बर्फ को पिघलाने और विश्वास बहाली में बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत और नॉर्डिक देश वर्तमान में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), सूचना प्रौद्योगिकी, समुद्री अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मोर्चों पर एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। आइसलैंड की पीएम द्वारा संबंध शब्द को अपनाए जाने ने इस शिखर सम्मेलन को एक यादगार मोड़ दे दिया है।