भारत ने इसकी निंदा कर संयम की अपील की
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परमाणु बिजली घर के अंदर विस्फोट
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इस किस्म की हरकतें अस्वीकार्य हैं
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हर समस्या का हल बातचीत से हो
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत ने सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात के बराका परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए ड्रोन हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। भारत ने इस कृत्य को अस्वीकार्य और एक खतरनाक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है। इसके साथ ही, मध्य पूर्व में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत ने सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और एक बार फिर बातचीत तथा कूटनीति के रास्ते पर लौटने का पुरजोर आग्रह किया है।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में, भारत ने संयुक्त अरब अमीरात की एकमात्र परमाणु सुविधा को निशाना बनाकर किए गए इस हमले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा, भारत यूएई में बराका परमाणु सुविधा को निशाना बनाकर किए गए हमले से बेहद चिंतित है। इस तरह की हरकतें पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं और यह एक खतरनाक तनाव को दर्शाती हैं। हम तत्काल प्रभाव से सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत तथा कूटनीति के मार्ग पर वापस आने का आह्वान करते हैं।
भारत की यह प्रतिक्रिया यूएई सरकार द्वारा उस आधिकारिक पुष्टि के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि एक ड्रोन ने बराका परमाणु सुविधा के आंतरिक दायरे के ठीक बाहर स्थित एक बिजली जनरेटर पर हमला किया है। संयुक्त अरब अमीरात ने इस हमले की तीव्र भर्त्सना करते हुए इसे एक आतंकवादी हमला करार दिया। हालांकि, यूएई प्रशासन ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए यह भी राहत जताई कि मुख्य परमाणु ऊर्जा संयंत्र को इस हमले से कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और वह पूरी तरह सुरक्षित है।
संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि यह हमला एक खतरनाक उकसावे की कार्रवाई और आक्रामकता का एक अस्वीकार्य कृत्य है, जिसने सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती दी है। यूएई मंत्रालय ने आगे कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाना अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और मानवीय सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। इस तरह की घटनाएं आम नागरिकों, पर्यावरण और पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए बेहद गंभीर जोखिम पैदा करती हैं।
यूएई के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रस्ताव भी इस बात को दृढ़ता से रेखांकित करते हैं कि नागरिक परमाणु सुविधाओं को सैन्य हमलों या शत्रुतापूर्ण कृत्यों से सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य है। संयुक्त अरब अमीरात ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह अपनी संप्रभुता या राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा और अंतर्राष्ट्रीय कानून के दायरे में रहते हुए कूटनीतिक, कानूनी या सैन्य माध्यमों से इसका करारा जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।