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पानी से वाहन संचालन की विधि का देश में परीक्षण, देखें एनिमेशन वीडियो

भारत के ईंधन संकट को दूर करने का भारत में जांच जारी

  • भारतीय तेल कंपनियों में परीक्षण

  • दस फीसद खर्च कम कर सकता है

  • उत्सर्जन भी काफी घटाने में सक्षम

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वैश्विक तेल बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारत जब भारी ऊर्जा आयात लागत और कमजोर होते रुपये की दोहरी चुनौती से जूझ रहा है, तब मोनाको की एक फ्यूल टेक्नोलॉजी कंपनी ने एक ऐसा समाधान खोजने का दावा किया है जो हमारी आंखों के सामने ही छिपा था: पानी। फोवे इको सॉल्यूशंस नामक इस कंपनी का दावा है कि उसकी पेटेंटेड कैविटेक फ्यूल इमल्शन टेक्नोलॉजी के जरिए उद्योग बिना किसी इंजन संशोधन या प्लांट को बंद किए ईंधन की खपत में 10 प्रतिशत तक की कटौती कर सकते हैं और हानिकारक उत्सर्जन (इमिशन) को भी भारी मात्रा में घटा सकते हैं।

यह प्रस्ताव भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय पर आया है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जबकि सरकारी तेल कंपनियां वैश्विक कीमतों के झटके से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए कथित तौर पर हर दिन 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं।

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कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी हेमंत सोंधी ने बताया कि इस प्रणाली के मूल में कंट्रोल कैविटेशन टेक्नोलॉजी है। यह तकनीक बिना किसी रासायनिक एडिटिव्स (केमिकल) का उपयोग किए ईंधन तेल (फ्यूल ऑयल) के भीतर पानी की सूक्ष्म बूंदों को बिखेरकर एक अनूठा मिश्रण (इमल्शन) तैयार करती है। जब इसे जलाया जाता है, तो ये बूंदें दहन कक्ष के अंदर माइक्रोविस्फोट पैदा करती हैं, जिससे ईंधन बेहद महीन कणों में टूट जाता है और पूरी क्षमता के साथ कुशलता से जलता है।

कंपनी और स्वतंत्र परीक्षण आंकड़ों के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप ईंधन की खपत कम होती है और उत्सर्जन में भारी कमी आती है। सोंधी ने बताया कि डेनमार्क में अल्फा लावल की सुविधा में किए गए स्वतंत्र परीक्षणों में बॉयलरों में 6.3 प्रतिशत और समुद्री इंजनों में 8.7 प्रतिशत की ईंधन बचत देखी गई। इसके अलावा, स्कोर्पियो टैंकर्स के जहाजों पर किए गए परीक्षणों में बंकर ईंधन की लगभग 10 प्रतिशत की बचत दर्ज की गई, जबकि भारतीय रिफाइनरियों और इस्पात (स्टील) संयंत्रों के परीक्षणों में 3.6 से 6 प्रतिशत तक की ईंधन बचत देखी गई।

कंपनी ने इंडियन ऑयल की हल्दिया रिफाइनरी और बीपीसीएल मथुरा जैसी जगहों पर इसके सफल परीक्षण किए हैं। भारत के थर्मल पावर सेक्टर के लिए भी इसके मायने बड़े हैं, क्योंकि कोयला आधारित संयंत्रों में बॉयलर शुरू करने और बंद करने के दौरान होने वाली अक्षम ईंधन खपत को यह बिना किसी नए बुनियादी ढांचे के तुरंत कम कर सकती है।

सोंधी ने इसे भारत के लिए एक कूटनीतिक आर्थिक हथियार बताते हुए कहा, चूंकि भारत बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए बचा हुआ हर एक लीटर ईंधन सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) की रक्षा करता है और रुपये पर दबाव कम करता है।