अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के अलावा अदालत से भी झटका
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न्यूयार्क की अदालत से आया है फैसला
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ट्रंप प्रशासन के शुल्क को अवैध बताया
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भारत पर भी पड़ा है इसका बुरा असर
एजेंसियां
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार रणनीति को गुरुवार को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिका की एक संघीय व्यापार अदालत ने व्यवस्था दी है कि प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 फीसद के अस्थायी वैश्विक टैरिफ संघीय कानून के तहत कानूनी रूप से उचित नहीं थे। न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने 2-1 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया।
पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति को दी गई शक्तियों का उल्लंघन किया है। न्यायाधीशों ने इन शुल्कों को अमान्य और कानून द्वारा अनधिकृत घोषित किया। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगभग हर देश से होने वाले आयात पर लगाए गए व्यापक टैरिफ को भी रद्द कर दिया था।
भारत भी पिछले अमेरिकी टैरिफ शासन से प्रभावित हुआ था। रूस से कच्चे तेल के निरंतर आयात के कारण भारत को 25 प्रतिशत मूल शुल्क के साथ 25 प्रतिशत अतिरिक्त दंड शुल्क का सामना करना पड़ा था। हालांकि, बाद में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार व्यवस्था के तहत इस प्रभावी दर को घटाकर 18 फीसद कर दिया गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन व्यापक उपायों को पूरी तरह खारिज कर दिया था।
मौजूदा फैसले का दायरा गुरुवार का निर्णय ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत लगाए गए 10 फीसद के उन अस्थायी वैश्विक शुल्कों पर केंद्रित था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के फरवरी के फैसले के बाद लगाया गया था। ये शुल्क 24 जुलाई तक प्रभावी रहने वाले थे। हालांकि, अदालत ने इन शुल्कों पर राष्ट्रव्यापी रोक नहीं लगाई है। वर्तमान में यह फैसला केवल उन तीन वादियों पर लागू होता है जिन्होंने मुकदमा दायर किया था—वाशिंगटन राज्य, स्पाइस कंपनी बर्लैप एंड बैरल और खिलौना निर्माता बेसिक फन।
जस्टिस सेंटर के निदेशक जेफरी श्वाब ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जो कंपनियां इस मामले में सीधे तौर पर शामिल नहीं थीं, उन्हें ये शुल्क चुकाने होंगे या नहीं। ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का हवाला देते हुए व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया था। हालांकि, अदालत का मानना है कि संविधान के तहत कर और टैरिफ लगाने का अधिकार मुख्य रूप से अमेरिकी कांग्रेस के पास है। उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देगा।