अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा विधायक दल का फैसला
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ममता को उनकी सीट पर जाकर हराया
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राज्यपाल ने सदन को बर्खास्त किया था
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दिलीप घोष ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा
राष्ट्रीय खबर
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक युगांतरकारी अध्याय की शुरुआत करते हुए, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी को आधिकारिक तौर पर राज्य का अगला मुख्यमंत्री नामित कर दिया गया है। यह घोषणा राज्य में मचे भारी राजनीतिक घमासान और संवैधानिक गतिरोध के बीच हुई है।
इस घटनाक्रम की पटकथा 4 मई को घोषित विधानसभा चुनाव परिणामों के साथ ही लिख दी गई थी, जिसमें भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए सदन में स्पष्ट दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। हालांकि, चुनावी नतीजों के बाद एक संवैधानिक संकट की स्थिति तब पैदा हो गई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह कहते हुए पद छोड़ने से इनकार कर दिया कि ये परिणाम सच्चे जनमत का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
इस अड़ियल रुख के दो दिन बाद, राज्यपाल आर.एन. रवि ने हस्तक्षेप करते हुए कठोर कदम उठाया। राज्यपाल कार्यालय ने गुरुवार को संविधान के अनुच्छेद 174(2)(बी) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निवर्तमान कैबिनेट और राज्य विधानसभा को भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। लोक भवन (पूर्व नाम राजभवन) द्वारा जारी वक्तव्य में स्पष्ट किया गया कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में नेतृत्व के सवाल पर अंतिम मुहर लगी। बैठक की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद थे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर नेता दिलीप घोष ने शुभेंदु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। मुख्यमंत्री की रेस में हालांकि प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य, सुकांत मजूमदार और स्वपन दासगुप्ता जैसे नाम भी चर्चा में थे, लेकिन शुभेंदु के जमीनी अनुभव और संघर्ष को देखते हुए उन्हें वरीयता दी गई।
भाजपा की यह पहली सरकार 9 मई को शपथ ग्रहण करेगी। शुभेंदु अधिकारी, जिन्हें राजनीति में जायंटकिलर के नाम से जाना जाता है, अब बंगाल की कमान संभालेंगे। यह सत्ता परिवर्तन पश्चिम बंगाल में पिछले 15 वर्षों से चले आ रहे तृणमूल कांग्रेस के शासन के अंत का प्रतीक है। ममता बनर्जी, जिन्होंने दशक भर से अधिक समय तक राज्य की राजनीति पर निर्विवाद वर्चस्व बनाए रखा था, उनके लिए यह परिणाम उनके करियर का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। 2026 का यह चुनाव न केवल भाजपा की जीत है, बल्कि बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक विचारधारा में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है।